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बंगले पर फिजूलखर्ची रोकने का फैसला, PWD ने किया टेंडर रद्द
By EditorialPublished on
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बंगले में रेनोवेशन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। 4 जुलाई को खुला टेंडर अब रद्द कर दिया गया है, जिसमें 14 एसी, 9 लाख रुपये का टीवी, 6 लाख की लाइटें और अन्य महंगे फिक्स्चर शामिल थे। बंगले के इस भव्य रेनोवेशन पर उठे सवालों के बाद पीडब्ल्यूडी ने बड़ा कदम उठाते हुए टेंडर को रद्द कर दिया है।

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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बंगले के रेनोवेशन को लेकर सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री के राजनिवास मार्ग स्थित बंगला नंबर 1/8 के बिजली और अन्य उपकरणों के काम के लिए 4 जुलाई को खुला 60 लाख रुपये का टेंडर अब रद्द कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसे प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए रद्द किया है।
महंगे उपकरणों की थी तैयारी :
टेंडर दस्तावेजों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के बंगले में 14 एयर कंडीशनर, करीब 9 लाख रुपये का टेलीविजन, 6 लाख रुपये की लाइटें और अन्य फिक्स्चर लगाने का प्रस्ताव था। इसके तहत बिजली के अन्य उपकरण भी लगाए जाने थे। इस पूरे काम की अनुमानित लागत करीब 60 लाख रुपये थी।
दो बंगले आवंटित, एक शिविर कार्यालय के लिए :
रेखा गुप्ता को लोक निर्माण विभाग ने राजनिवास मार्ग पर दो बंगले आवंटित किए हैं। एक बंगला उनके निजी निवास के लिए और दूसरा शिविर कार्यालय के लिए है। उन्होंने पिछले सप्ताह शिविर कार्यालय का उद्घाटन भी किया था।
आम आदमी पार्टी का तंज: 'मायामहल' :
मुख्यमंत्री के बंगले के रेनोवेशन पर आम आदमी पार्टी ने कड़ा हमला बोला है। आप नेताओं ने सीएम के बंगले को 'मायामहल' बताते हुए कहा कि जब दिल्ली के लोग महंगाई और प्राइवेट स्कूलों की बढ़ती फीस से परेशान हैं, तब मुख्यमंत्री लाखों के एसी, महंगे झूमर और लाइट्स से अपने बंगले को सजाने में व्यस्त हैं।
कांग्रेस ने भी उठाए सवाल :
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी रेखा गुप्ता पर तंज कसते हुए कहा, "शीश महल करते करते अब रंग महल बनवाया जा रहा है। जहां लोग अपने घरों के तोड़े जाने पर बुलडोज़र के सामने लेटने को मजबूर हैं, वहीं मुख्यमंत्री खुद दो बंगलों को मिलाकर आलीशान रेनोवेशन करवा रही हैं।"
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सियासी हलचल तेज :
बंगले पर खर्च और टेंडर रद्द होने को लेकर दिल्ली की सियासत गर्मा गई है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों ने इसे जनता के साथ अन्याय बताया है, जबकि सरकार की ओर से अब तक कोई औपचारिक सफाई सामने नहीं आई है।
आगे क्या ?
टेंडर रद्द होने के बावजूद इस मुद्दे पर सियासत थमने के आसार नजर नहीं आ रहे। विपक्ष इसे जनता से जुड़े मुद्दों से भटकाने और जनता के पैसे के दुरुपयोग का मामला बता रहा है।

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