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गुरु दत्त की 100वी सालगिरह पर; IFFM का ट्रिब्यूट
By EditorialPublished on
भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर के महान फिल्म निर्माता और अभिनेता गुरु दत्त की 100वीं जयंती पर पूरा फिल्म जगत उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। अपनी अद्वितीय कला और संवेदनशील फिल्मों से दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ने वाले गुरु दत्त की याद में उनकी दो कालजयी फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग का आयोजन किया जा रहा है। यह मौका न केवल उनकी सिनेमाई विरासत को सलाम करने का है, बल्कि नई पीढ़ी को उनके अनमोल योगदान से रूबरू कराने का भी है।

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भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम युग के महान फिल्मकार और अभिनेता गुरु दत्त के जन्मशताब्दी वर्ष को खास अंदाज में मनाया जा रहा है। उनकी कालजयी फिल्मों की गूंज एक बार फिर बड़े पर्दे पर सुनाई देगी। मेलबर्न में आयोजित होने वाले भारतीय फिल्म महोत्सव (IFFM) 2025 में गुरु दत्त की दो महान कृतियों ‘प्यासा’ और ‘कागज़ के फूल’ की विशेष 4K रीस्टोर्ड स्क्रीनिंग की जाएगी।
भारतीय सिनेमा की आत्मा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की कोशिश :
IFFM की निदेशक मीतू भौमिक लांगे ने इस पहल पर बात करते हुए कहा, “गुरु दत्त की फिल्में केवल क्लासिक नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की आत्मा हैं। हम उनकी संवेदनशीलता, सौंदर्य और गहराई को नई पीढ़ी के दर्शकों तक पहुँचाना चाहते हैं।” गुरु दत्त, जिन्होंने प्रेम, अकेलेपन और समाज की विडंबनाओं को परदे पर बेहतरीन ढंग से पेश किया, आज भी फिल्मप्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं।
भारत में भी होगा गुरु दत्त महोत्सव, कई फिल्मों की होगी स्क्रीनिंग :
IFFM के अलावा, भारत में भी 8 से 10 अगस्त तक अल्ट्रा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट के सहयोग से गुरु दत्त की फिल्मों का खास प्रदर्शन किया जाएगा। इस विशेष शोकेस में 'प्यासा' और 'कागज़ के फूल' के अलावा उनकी अन्य यादगार फिल्मों जैसे:
- आर पार,
- चौदहवीं का चांद,
- मिस्टर एंड मिसेज 55,
- बाज़ , इत्यादी भी दिखाई जाएंगी।
इन सभी फिल्मों को NFDC-NFAI (National Film Development Corporation - National Film Archive of India) द्वारा सावधानीपूर्वक 4K में रीस्टोर किया गया है, ताकि उनकी दृश्यभाषा और भावनात्मक गहराई जस की तस बनी रहे।
सिनेमा के संरक्षण की दिशा में अहम कदम :
अल्ट्रा मीडिया के सीईओ सुशील कुमार अग्रवाल ने कहा, “हमें गर्व है कि हम गुरु दत्त की कालजयी फिल्मों को बड़े पर्दे पर नए सिरे से पेश कर रहे हैं। यह सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास है।”
वहीं, NFDC के निदेशक प्रकाश मगदुम ने कहा कि यह पूरा आयोजन राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन (National Film Heritage Mission) का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत के फिल्मी इतिहास और धरोहर को संरक्षित करना है। उन्होंने कहा, “गुरु दत्त की फिल्में जैसे ‘साहिब बीबी और गुलाम’ और ‘सांझ और सवेरा’ आज भी दर्शकों को उतनी ही गहराई से छूती हैं जितनी उनकी रिलीज के समय छूती थीं।”
क्यों खास है यह आयोजन ?
गुरु दत्त भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा फिल्मकारों में रहे हैं, जिन्होंने तकनीकी उत्कृष्टता के साथ-साथ गहन मानवीय भावनाओं को बेहद खूबसूरती से परदे पर उतारा। उनकी फिल्मों के विषय, सिनेमेटोग्राफी, संगीत और संवाद आज भी फिल्म जगत के लिए आदर्श हैं। 'प्यासा' और 'कागज़ के फूल' जैसी फिल्मों में उन्होंने न सिर्फ सामाजिक विडंबनाओं को दिखाया बल्कि अपनी संवेदनशीलता से सिनेमा को कला के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया।
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कब और कहाँ ?
- भारत: 8 से 10 अगस्त 2025 तक, प्रमुख सिनेमाघरों में।
- ऑस्ट्रेलिया (मेलबर्न): IFFM 2025 के दौरान, अगस्त में।
गुरु दत्त का यह शताब्दी वर्ष सिर्फ एक कलाकार के जीवन का उत्सव नहीं है, बल्कि भारतीय सिनेमा की उस विरासत का जश्न है जिसने दुनिया भर के सिनेप्रेमियों को भारतीय कहानियों से जोड़ा। उनकी फिल्मों की पुन: प्रस्तुति से नई पीढ़ी उनके संवेदनशील और कलात्मक दृष्टिकोण को करीब से महसूस कर पाएगी।
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