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अमित शाह होंगे राजनीति से रिटायर; बताई अगली की प्लानिंग..
By EditorialPublished on
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पहली बार अपने रिटायरमेंट प्लान का खुलासा किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि राजनीति से संन्यास लेने के बाद वह समाज सेवा और सहकारिता आंदोलन को आगे बढ़ाने में अपना जीवन समर्पित करेंगे। अमित शाह के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजनीति से रिटायरमेंट के बाद अपने जीवन की योजना का खुलासा कर दिया है। बुधवार, 9 जुलाई 2025 को आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष’ के अवसर पर गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सहकारी क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करते हुए उन्होंने अपने फ्यूचर प्लान के बारे में बात की।
बनासकांठा के बदलाव की कहानी से शुरू किया संवाद :
अमित शाह ने गुजरात के बनासकांठा जिले का उदाहरण देते हुए कहा, "जब मैं पैदा हुआ था, तब बनासकांठा के लोगों को हफ्ते में सिर्फ एक बार नहाने के लिए पानी मिलता था।" उन्होंने बताया कि बनासकांठा और कच्छ जैसे जिले कभी पानी की भीषण कमी से जूझते थे, लेकिन आज वही इलाके सहकारिता के ज़रिए आर्थिक रूप से मजबूत हो चुके हैं। आज वहाँ के किसान केवल दूध उत्पादन से सालाना करोड़ों रुपये की कमाई कर रहे हैं।
रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगे अमित शाह ?
अमित शाह ने कहा, "मैंने तय किया है कि राजनीति से रिटायरमेंट के बाद अपना शेष जीवन वेदों, उपनिषदों और प्राकृतिक खेती के अध्ययन में बिताऊंगा।" उन्होंने प्राकृतिक खेती को वैज्ञानिक पद्धति बताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों से पैदा होने वाले खाद्य पदार्थ कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं, जबकि प्राकृतिक खेती न केवल शरीर को स्वस्थ रखती है, बल्कि कृषि उत्पादकता को भी बढ़ाती है।
‘सहकार से समृद्धि’ का विजन :
गृह मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ विजन का जिक्र करते हुए कहा कि सहकारिता मंत्रालय किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस मॉडल के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
25 छोटे बिजनेस मॉडल तैयार :
कार्यक्रम के दौरान एक प्रतिभागी के सवाल के जवाब में अमित शाह ने बताया कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) के लिए लगभग 25 छोटे व्यवसाय मॉडल तैयार किए गए हैं। PACS को इन मॉडलों के तहत विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर सशक्त बनाया जाएगा ताकि वे किसानों की आय बढ़ा सकें।
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कृषि और ग्रामीण भारत की नई दिशा :
अमित शाह के इस संवाद से साफ है कि वे राजनीति के बाद भी ग्रामीण भारत और किसानों के उत्थान के लिए काम करते रहना चाहते हैं। वेदों और उपनिषदों के अध्ययन के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर वह समाज के व्यापक हित में योगदान देना चाहते हैं।
अमित शाह का यह फ्यूचर प्लान न केवल व्यक्तिगत शांति और अध्यात्म से जुड़ा है, बल्कि भारत के कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की सोच का प्रतीक है। उन्होंने सहकारिता आंदोलन के जरिए किसानों के जीवन स्तर को सुधारने और प्राकृतिक खेती के जरिए देश को स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा है।

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