✕
सरकार ने नहीं बढ़ाई मियाद; बड़े अफसर को निराशा
By EditorialPublished on
यूपी के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज़ है। IAS मनोज कुमार सिंह के सेवा विस्तार पर सस्पेंस बरकरार है। उनसे पहले मुख्य सचिव रहे दुर्गा शंकर मिश्र को रिटायरमेंट के बाद ढाई साल का सेवा विस्तार मिला था। अब सवाल यह है कि क्या इतिहास खुद को दोहराएगा या फिर किसी नए चेहरे को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी?
_202507291249257344.jpg)
x
_202507291249257344.jpg)
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह को सेवा विस्तार मिलने की संभावनाएं अब बेहद कम दिखाई दे रही हैं। उनका मौजूदा कार्यकाल 31 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है, और सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने लगभग पंद्रह दिन पहले केंद्र सरकार को सेवा विस्तार के लिए पत्र भेजा था। हालांकि अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है, जिससे नए मुख्य सचिव की नियुक्ति तय मानी जा रही है।
सियासी और प्रशासनिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मनोज कुमार सिंह को सेवा विस्तार मिलेगा, जैसा कि उनके पूर्ववर्ती दुर्गा शंकर मिश्र को रिटायरमेंट के बाद ढाई साल का विस्तार मिला था, या फिर नया चेहरा यूपी प्रशासन की कमान संभालेगा।
मुख्य सचिव पद की दौड़ में तीन नाम आगे :
सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में मुख्य सचिव पद के लिए तीन वरिष्ठ IAS अफसर सबसे आगे चल रहे हैं।
- एसपी गोयल:1989 बैच के IAS अधिकारी और वर्तमान में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव। वे सबसे वरिष्ठ उम्मीदवार हैं। यदि उन्हें यह जिम्मेदारी मिलती है तो वे जनवरी 2027 तक मुख्य सचिव बने रह सकते हैं। गोयल को प्रशासनिक अनुभव और सीएम के साथ बेहतर तालमेल के लिए मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
- देवेश चतुर्वेदी:1989 बैच के ही IAS अफसर, जो फिलहाल केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। हालांकि, फरवरी 2026 में रिटायर होने के कारण उनका कार्यकाल केवल सात महीने का ही रह जाएगा, जिससे उनकी दावेदारी कमजोर पड़ सकती है।
- दीपक कुमार:1990 बैच के IAS अधिकारी और वर्तमान में कृषि उत्पादन आयुक्त व अपर मुख्य सचिव वित्त। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाने वाले दीपक कुमार का कार्यकाल अक्टूबर 2026 तक है, जिससे उन्हें लगभग 15 महीने तक सेवा देने का अवसर मिल सकता है। यह कारक उनकी दावेदारी को मजबूत करता है।
क्या दोहराया जाएगा इतिहास ?
मनोज कुमार सिंह से पहले मुख्य सचिव रहे दुर्गा शंकर मिश्र को रिटायरमेंट के बाद ढाई साल का सेवा विस्तार दिया गया था। अब सवाल यह है कि क्या वही परंपरा इस बार भी कायम रहेगी या सरकार प्रशासनिक नेतृत्व में बदलाव कर किसी नए चेहरे को जिम्मेदारी सौंपेगी।
अभी प्रातःकाल Telegram चैनल को Subscribe करें और बनें ₹25,000 के लकी विनर!
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल :
मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर चर्चाओं का दौर तेज़ हो गया है। यह पद न केवल राज्य प्रशासन की धुरी है बल्कि मुख्यमंत्री के विज़न को लागू करने में भी अहम भूमिका निभाता है। इसलिए इस बार का चयन योगी सरकार की प्राथमिकताओं और आने वाले वर्षों की प्रशासनिक दिशा का संकेत देगा। जैसे-जैसे 31 जुलाई नज़दीक आ रही है, उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में उत्सुकता चरम पर है। सभी की निगाहें केंद्र और राज्य सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।

Editorial
Next Story
Related News
X
