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जगदीप धनखड़ ने शुरू की पैकिंग; नेताओं से दूरी बरकरार
By EditorialPublished on
उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति एन्क्लेव खाली करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस्तीफा मंजूर होने से एक दिन पहले ही उन्होंने अपना सामान पैक करना शुरू कर दिया था। करीब 15 महीने रहने के बाद अब वह आधिकारिक निवास छोड़ने जा रहे हैं, और फिलहाल किसी भी राजनीतिक नेता से मुलाकात नहीं की है।
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संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, सोमवार (21 जुलाई 2025) को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने पूरे देश को चौंका दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे पत्र में स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया। इस्तीफे के साथ ही उन्होंने उपराष्ट्रपति भवन को खाली करने की तैयारी शुरू कर दी। राष्ट्रपति ने मंगलवार (22 जुलाई 2025) को उनका त्यागपत्र स्वीकार कर लिया।
इस्तीफे के बाद शुरू हुई पैकिंग :
सोमवार रात लगभग 9 बजे धनखड़ अचानक राष्ट्रपति भवन पहुंचे और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस्तीफा सौंप दिया। करीब आधे घंटे बाद उन्होंने अपना त्यागपत्र सोशल मीडिया पर साझा किया। उसी दिन से उन्होंने उपराष्ट्रपति भवन का सामान पैक करना शुरू कर दिया। लगभग 15 महीने उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में रहने के बाद अब उन्हें यह आधिकारिक निवास छोड़ना होगा।
अब मिलेगा टाइप-8 कैटेगरी का बंगला :
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, धनखड़ को अब लुटियंस दिल्ली या अन्य किसी इलाके में टाइप-8 श्रेणी का सरकारी बंगला आवंटित किया जाएगा। यह श्रेणी आम तौर पर वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों और राष्ट्रीय दलों के अध्यक्षों को दी जाती है। धनखड़ पिछले वर्ष अप्रैल में संसद भवन परिसर के पास बने नवनिर्मित उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में शिफ्ट हुए थे।
विपक्ष ने उठाए सवाल :
कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि स्वास्थ्य कारणों के अलावा उनके इस्तीफे के पीछे कोई गहरी वजह हो सकती है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि “किसान पुत्र को सम्मानजनक विदाई नहीं दी जा रही।” कई विपक्षी नेताओं ने उनसे मुलाकात की कोशिश की, लेकिन समय नहीं मिल पाया।
विपक्ष का रुख बदला :
दिलचस्प बात यह है कि जिन विपक्षी सांसदों ने पहले धनखड़ पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया था और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की थी, वही अब उनकी तारीफ कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि धनखड़ ने उपराष्ट्रपति रहते हुए गरिमा बनाए रखी और उन्हें उचित सम्मान के साथ विदाई मिलनी चाहिए थी।
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राजनीतिक हलचल और आगे का रास्ता :
धनखड़ ने इस्तीफा देने के बाद से किसी भी पार्टी नेता से मुलाकात नहीं की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका इस्तीफा मानसून सत्र के बीच सत्ता संतुलन और विपक्ष-सरकार के समीकरण पर असर डाल सकता है। इस बीच, उनके स्वास्थ्य और आगे की भूमिका को लेकर अटकलें जारी हैं।
अब जबकि राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, जगदीप धनखड़ जल्द ही VP हाउस को छोड़कर नए सरकारी आवास में शिफ्ट होंगे। अचानक लिया गया उनका यह निर्णय आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चाओं का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।

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