दिल्ली मस्जिद में सीक्रेट मीटिंग; मौर्य की तीखी प्रतिक्रिया
संसद के मानसून सत्र के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा दिल्ली की एक मस्जिद में सहयोगियों और सांसदों के साथ कथित बैठक करने को लेकर सियासी बवाल मच गया है। इस बैठक की तस्वीरें सामने आते ही बीजेपी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा और उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सपा के रुख पर कड़ा सवाल उठाया।
मौर्य ने आरोप लगाया कि “सपा का चरित्र हमेशा से हिन्दू विरोधी रहा है। अखिलेश यादव और उनकी पार्टी तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं। मस्जिद में मौलाना के साथ बैठकर वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे मुसलमानों के साथ हैं।” उन्होंने कहा कि बीजेपी धर्म की राजनीति नहीं करती और श्रीराम जन्मभूमि से पूरे देश की आस्था जुड़ी हुई है।
केशव मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी अखिलेश को निशाना बनाते हुए तंज कसा, “मस्जिद गए लेकिन सफ़ेद 'जालीदार टोपी' ले जाना भूल गए सपा बहादुर श्री अखिलेश यादव। जब ख़्याल ही रखना था तो कब्जा करने वाली जमात का पूरा ख़्याल रखना चाहिए था।”
उन्होंने मतदाता पुनरीक्षण सूची पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि मृत मतदाताओं के नाम पर वोट डलवाने वालों को अब परेशानी हो रही है। “चुनाव आयोग अच्छा काम कर रहा है, हर दल को इसका स्वागत करना चाहिए। जो लोग झूठे वोटों से जीतते थे, अब उन्हें दिक्कत हो रही है, चाहे वे काले कपड़े पहनें या हरे, फर्क नहीं पड़ता।”
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इस मुद्दे पर सियासी बहस तेज़ हो गई है। बीजेपी इसे सपा के तुष्टिकरण की राजनीति बता रही है, वहीं अखिलेश यादव ने जवाब दिया कि “भाजपा को समझना चाहिए कि आस्था सबको जोड़ती है। वे सिर्फ मामले को गलत मोड़ देने की कोशिश कर रहे हैं।”
राजनीतिक गलियारों में इस कथित मस्जिद बैठक को लेकर चर्चाएं तेज़ हैं और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में और गर्मी ला सकता है।
Editorial

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