चीन की इस कंपनी से जुड़ते ही रिलायंस को मिला वैश्विक बूस्ट
भारत की टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। चीनी मूल की ग्लोबल फैशन ई-कॉमर्स कंपनी Shein और मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस रिटेल अब मिलकर भारत को शीन ब्रांड का उत्पादन हब बनाने जा रहे हैं। इस योजना के तहत अगले 6 से 12 महीनों में भारत में बने शीन ब्रांड के कपड़े अमेरिका और ब्रिटेन सहित दुनिया के तमाम हिस्सों में बेचे जाएंगे।
क्या है पूरा प्लान ?
शीन का लक्ष्य है कि वह भारत में अपने सप्लायर्स की संख्या 150 से बढ़ाकर 1,000 कर दे। ये भारतीय सप्लायर्स भारत में ही शीन ब्रांड के कपड़े तैयार करेंगे, जिनकी लिस्टिंग पहले अमेरिकी और ब्रिटिश वेबसाइट्स पर की जाएगी। टारगेट है कि 12 महीनों में 1000 फैक्ट्रियां भारत में शीन के कपड़े बनाएंगी।
चीन से क्यों हट रहा है शीन ?
शीन को यह फैसला इसलिए लेना पड़ा क्योंकि अमेरिका ने चीनी आयात पर भारी टैरिफ लगा दिया है। चीन में अब भी कंपनी के 7,000 सप्लायर्स हैं, लेकिन अब वह भारत जैसे देशों की ओर शिफ्ट कर रही है ताकि वह अपने वैश्विक नेटवर्क को बचाए रख सके।
रिलायंस के साथ बड़ी डील :
शीन ने भारत में अपने ब्रांड को चलाने का लाइसेंस रिलायंस रिटेल को दिया है। इसका मतलब यह है कि भारत में शीन के कपड़ों की मैन्युफैक्चरिंग, बिक्री, सप्लाई चेन और ऑपरेशन्स की पूरी जिम्मेदारी रिलायंस की होगी। फरवरी 2025 में SheinIndia.in वेबसाइट के ज़रिए शीन की भारत में वापसी भी हो चुकी है।
क्या होगा असर ?
भारत में हजारों नए रोजगार पैदा होने की संभावना है। छोटे और मध्यम दर्जे के कपड़ा कारोबारियों को बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म मिलेगा। भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने लगेगी।
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सरकार की नजर में डील :
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस डील पर संसद में जानकारी देते हुए बताया था कि यह साझेदारी भारतीय इंडस्ट्री के लिए एक सुनहरा मौका है।
भारत में शीन की वापसी :
शीन ने 2018 में भारत में एंट्री की थी, लेकिन 2020 में चीन विरोधी कदमों के तहत इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। अब रिलायंस के साथ साझेदारी के जरिए उसने वापसी की है — इस बार भारतीय निर्माण के साथ, भारतीय बाजार के लिए और दुनियाभर के ग्राहकों के लिए। कुल मिलाकर, शीन और रिलायंस की यह साझेदारी सिर्फ एक बिजनेस डील नहीं, बल्कि भारत के फैशन मैन्युफैक्चरिंग को ग्लोबल ब्रांडिंग देने की शुरुआत है।
Editorial

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