ईरानी जनरल की मौत में पाक लिंक; रिपोर्ट में दावा
ईरान और इज़रायल के बीच जारी तनावपूर्ण टकराव के बीच अब पाकिस्तान पर बड़ा आरोप लगा है। ईरानी सैन्य कमांडर मोहम्मद हुसैन बकरी की हत्या के मामले में अब ईरानी सूत्रों ने दावा किया है कि इस हत्या में पाकिस्तानी सेना प्रमुख और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की भूमिका संदिग्ध है। इस दावे ने क्षेत्रीय राजनीति और खुफिया समीकरणों में हलचल मचा दी है।
GPS वॉच बना कमांडर की मौत का कारण ?
ईरानी खुफिया सूत्रों के अनुसार, मई के आखिर में आसिम मुनीर ने तेहरान में कमांडर मोहम्मद हुसैन बकरी से मुलाकात की थी। उसी दौरान उन्होंने उन्हें एक स्मार्टवॉच गिफ्ट की, जिसमें GPS ट्रैकिंग सिस्टम एक्टिव था। दावा है कि इसी वॉच के ज़रिए उनकी सटीक लोकेशन इज़रायल को मिल गई, और 13 जून को हुए हवाई हमले में बकरी के साथ उनके दो डिप्टी भी मारे गए।
ईरानी मीडिया के अनुसार, बकरी की मौत इज़रायल की सबसे सटीक सैन्य हिट मानी जा रही है और इसमें मिली जानकारी बेहद अंदरूनी और गुप्त थी जो केवल सीमित लोगों को ही पता हो सकती थी।
ईरान की पीठ में 'छुरा'? पाक पर डबल गेम खेलने का आरोप :
ईरानी सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान इस संघर्ष में दोहरी भूमिका निभा रहा है। एक ओर वह इज़रायल के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर बयान देकर ईरान का समर्थन दिखाता है, वहीं दूसरी ओर वह पश्चिमी देशों और इज़रायल के साथ गुप्त सहयोग कर रहा है। यह भी दावा किया गया है कि आसिम मुनीर ने बकरी से मुलाकात के बाद चुपचाप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी भेंट की। अगर यह आरोप सही हैं, तो यह पाकिस्तान की विदेश नीति और खुफिया रणनीति पर गहरे सवाल खड़े करता है।
इज़रायल ने क्यों किया हमला ?
इज़रायली सेना ने 13 जून को ईरान पर जबर्दस्त हवाई हमला किया, जिसमें कई परमाणु वैज्ञानिक और सैन्य अधिकारी मारे गए। इज़रायली राष्ट्रपति बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान को न्यूक्लियर हथियार बनाने से रोकने के लिए की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि "ईरान तीन साल में 10,000 बैलिस्टिक मिसाइल तैयार कर सकता है, और अगर वो इज़रायल पर दागे गए तो क्या होगा?"
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अब तक का हाल: 400 से अधिक मौतें, 3,500 घायल :
ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इज़रायली हमलों में अब तक 400 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है, और करीब 3,500 लोग घायल हुए हैं। मरने वालों में शीर्ष सैन्य अधिकारी, परमाणु वैज्ञानिक और आम नागरिक शामिल हैं। संघर्ष अब एक खुली जंग में बदलता जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान का नाम सामने आना स्थिति को और जटिल बना रहा है।
अगर पाकिस्तान और आसिम मुनीर के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह पश्चिम एशिया में डिप्लोमैटिक और जियोपॉलिटिकल विस्फोट से कम नहीं होगा। यह स्पष्ट है कि यह केवल ईरान और इज़रायल की जंग नहीं रह गई, बल्कि अब इसमें पाकिस्तान, अमेरिका और बड़े स्तर की खुफिया साझेदारियों की परछाईं भी गहराने लगी है।
Editorial

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