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भारत-पाक जंग पर मदनी की चेतावनी; निरुपम ने दिया करारा जवाब
By EditorialPublished on
भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच मौलाना अरशद मदनी के 'जंग न हो' बयान ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। इस बयान पर कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि मौलाना मदनी को भारत सरकार या देश को कोई सीख देने की जरूरत नहीं है। निरुपम ने कहा कि अगर युद्ध होता है तो भारत को उसके परिणाम अच्छे से मालूम हैं और सरकार वही करेगी जो देशहित में होगा।
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5/5/2025 5:38:36 PM
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तल्खी के बीच देश में जंग और अमन को लेकर बहस छिड़ गई है। इसी कड़ी में जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के 'भारत-पाक में युद्ध न हो' वाले बयान पर अब शिवसेना नेता संजय निरुपम ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। निरुपम ने कहा कि अरशद मदनी की भावनाएं भारत से ज्यादा पाकिस्तान से जुड़ी नजर आती हैं और उन्हें देश को कोई सीख देने की जरूरत नहीं है।
संजय निरुपम ने कहा, "भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध नहीं होना चाहिए, ऐसा पाकिस्तान के लोग, भारत में रहने वाले जिहादी दंगाई प्रवृत्ति के मुसलमान और विरोधी पक्ष के नेता चाहते हैं। अरशद मदनी को डर है कि अगर युद्ध हुआ तो भारत पाकिस्तान को बर्बाद कर देगा। इसलिए उन्होंने यह बयान दिया है।"
निरुपम ने यह भी सवाल उठाया कि "जो लोग कहते हैं कि युद्ध नहीं होना चाहिए, वे क्या पहलगाम में मारे गए हिंदुओं की हत्या की जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं? क्या मदनी साहब इसके लिए आगे आएंगे?"
उन्होंने मदनी के बयान को एकतरफा बताया और कहा कि "इस्लाम एक विस्तारवादी मजहब है, जिसने धार्मिक संतुलन बिगाड़ा है। अगर आतंकियों की मंशा हिंदुओं की हत्या थी तो मदनी साहब को उसका विश्लेषण नहीं करना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि जांच में उनकी भूमिका भी सामने आ जाए।"
सिंधु जल और जनसंख्या नियंत्रण पर भी साधा निशाना :
निरुपम यहीं नहीं रुके। उन्होंने सिंधु जल समझौते के निलंबन पर मदनी की प्रतिक्रिया की ओर इशारा करते हुए कहा, "सिंधु नदी का पानी देवबंद नहीं आएगा, इसकी फिक्र मदनी साहब न करें। सरकार वही करेगी जो देशहित में होगा।" इसके अलावा संजय निरुपम ने मुस्लिम आबादी और जनसंख्या नियंत्रण पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि "आजादी के समय मुस्लिम आबादी 3 करोड़ थी, जो अब 20 करोड़ हो चुकी है। इंदिरा गांधी के समय परिवार नियोजन को हिंदुओं ने स्वीकार किया, लेकिन मुस्लिम समाज ने नहीं। अब देश की डेमोग्राफिक तस्वीर बदल रही है, यह चिंता का विषय है।" इस पूरे घटनाक्रम ने भारत-पाक तनाव की पृष्ठभूमि में देश की आंतरिक सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है। बयानबाजी के इस दौर में अब देखना यह है कि मौलाना मदनी या अन्य मुस्लिम संगठनों की ओर से क्या जवाब आता है।

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