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सोना लुढ़कने को तैयार; कीमतों में भारी गिरावट के संकेत!
By EditorialPublished on
फिलहाल Gold/Silver Ratio 100:1 के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, यानी एक औंस सोना खरीदने के लिए 100 औंस चांदी की कीमत चुकानी पड़ रही है। जबकि पारंपरिक रूप से यह अनुपात करीब 70:1 के आस-पास रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इतना बड़ा अंतर किसी बड़ी कीमतीय हलचल का संकेत हो सकता है – खासकर सोने में गिरावट या चांदी में उछाल की संभावना को बल मिलता है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि बाजार किसी बड़े मोड़ पर खड़ा हो सकता है।
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5/3/2025 12:55:04 PM
Gold Price :
3500 डॉलर की रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अब सोना फिसल रहा है, बाजार में मची हलचल, निवेशकों में चिंता जारी है। अप्रैल 2025 में गोल्ड ने 3,500 डॉलर प्रति औंस की ऐतिहासिक ऊंचाई को छूकर निवेशकों को चौंका दिया था। लेकिन अब इसकी चमक थोड़ी मद्धम होती नजर आ रही है। फिलहाल सोना 3,250 डॉलर के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, यानी अपने ऑल टाइम हाई से लगभग 250 डॉलर या करीब 7% नीचे। पिछले 9 महीनों में 50% की चढ़ाई करने वाले सोने में यह गिरावट निवेशकों के मन में एक बड़ा सवाल पैदा कर रही है – क्या गोल्ड रैली अब थम चुकी है?
रेशियो अलर्ट: सोना ओवरवैल्यूड ?
Gold/Silver Ratio फिलहाल 100:1 के स्तर पर पहुंच गया है। यह अनुपात दर्शाता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए 100 औंस चांदी की जरूरत है, जबकि ऐतिहासिक रूप से यह रेशियो 70:1 के आसपास रहा है। इसी तरह, Gold/Platinum Ratio भी खतरे की घंटी बजा रहा है। यह अनुपात अब 3.5 के स्तर पर है, जबकि ऐतिहासिक औसत 1 से 2 के बीच रहा है। इन आंकड़ों से संकेत मिलते हैं कि सोना ओवरवैल्यूड हो चुका है और इसमें करेक्शन आ सकता है।
क्या बदले हैं वो कारण जो बने थे सोने की तेज़ी का आधार ?
- 2022-23 में रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन-ताइवान तनाव और सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी ने सोने की मांग को पंख दिए।
- 2025 की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा घोषित नए टैरिफ्स ने बाजार में और डर पैदा किया और गोल्ड ने तेज़ी पकड़ी। लेकिन अब हवा बदलती दिख रही है। ट्रम्प का रवैया नरम हो रहा है, और अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड टॉक्स की संभावनाएं बन रही हैं।
- इसी कारण निवेशक अब इक्विटी और इंडस्ट्रियल कमोडिटीज़ की ओर झुकने लगे हैं, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
US Dollar Index हाल ही में 100 के पार पहुंच गया है। जो तीन सालों का उच्चतम स्तर है। डॉलर और सोना आमतौर पर विपरीत दिशा में चलते हैं। जैसे ही डॉलर मज़बूत हुआ, सोने की कीमतों को झटका लगा।
- अमेरिका की GDP में -0.3% गिरावट
- फेडरल रिजर्व की संभावित रेट कट (17-18 जून की FOMC मीटिंग)
- कंज़्यूमर कॉन्फिडेंस में गिरावट
- अमेरिका का बढ़ता कर्ज़ ($36 ट्रिलियन) इनमें से कोई भी कारक अगर तेज़ी से उभरता है, तो सोना फिर से रफ्तार पकड़ सकता है।
India की गोल्ड के मामले में काया है स्थिति ? आईए जानते हैं।
भारत में सोने की कीमतें फिलहाल ₹92,820 प्रति 10 ग्राम हैं, जो कि 22 अप्रैल को बने ₹1 लाख के रिकॉर्ड से काफ़ी नीचे हैं। यह गिरावट शादी-ब्याह और लॉन्ग टर्म निवेश के लिए डिप में खरीदने का अच्छा मौका हो सकता है।
इस बारे में जून में कुछ नयी फैसले समाने आने की संभावना हो सकती है। जून 2025 में दो बड़े इवेंट सोने की अगली दिशा तय करेंगे। 9 जून: ट्रम्प के 'Reciprocal Tariffs' की 90 दिन की डेडलाइन खत्म होगी। उसके बाद 17-18 जून: फेडरल रिजर्व की मीटिंग, जिसमें रेट कट की उम्मीद है। इन घटनाओं के बाद यह तय होगा कि सोना फिर चमकेगा या और फिसलेगा। इसपर निवेशकोंकी नजर राहने वाली हैं।

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