इंसाफ की दहाड़! अंकिता के कातिल करार; अब सजा का इंतजार
उत्तराखंड को झकझोर देने वाले अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय का ऐतिहासिक क्षण आ गया है। कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (एडीजे कोर्ट) ने शुक्रवार को तीनों आरोपियों — पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता — को हत्या और आपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य गंभीर धाराओं में दोषी करार दिया है। कुछ ही देर में तीनों दोषियों के खिलाफ सजा का ऐलान किया जाएगा।
तीनों दोषी करार, लगे गंभीर आरोप :
अदालत ने तीनों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 354 (महिला की मर्यादा का हनन) और 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी पाया है। इस बेहद संवेदनशील मामले में अदालत का यह फैसला पूरे उत्तराखंड और देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
कोर्ट का फैसला आते ही कोटद्वार के आस-पास सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं। गढ़वाल मंडल के विभिन्न जनपदों से पुलिस बल को कोटद्वार बुलाया गया है और अदालत परिसर के बाहर सड़कों पर बैरिकेडिंग लगाई गई है, जिससे कोई अप्रिय स्थिति न उत्पन्न हो।
क्या है पूरा मामला ?
18 सितंबर, 2022 को वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के पद पर कार्यरत 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि हत्या के बाद उसका शव हरिद्वार के पास चीला शक्ति नहर में फेंक दिया गया था। घटना के लगभग एक सप्ताह बाद, अंकिता का शव नहर से बरामद हुआ, जिससे पूरे प्रदेश में आक्रोश की लहर दौड़ गई।
आरोप था कि रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, जो एक पूर्व मंत्री का बेटा है, अपने कर्मचारियों सौरभ और अंकित के साथ मिलकर अंकिता पर रिजॉर्ट में आने वाले ‘विशेष मेहमानों’ को ‘अवैध सेवाएँ’ देने का दबाव बना रहा था। जब अंकिता ने इसका विरोध किया, तो उसे नहर में धक्का देकर उसकी हत्या कर दी गई।
दो साल लंबी कानूनी प्रक्रिया :
इस मामले में सुनवाई की शुरुआत 30 जनवरी, 2023 को कोटद्वार स्थित एडीजे कोर्ट में हुई। विशेष जांच दल (SIT) द्वारा 500 पन्नों का चार्जशीट दाखिल किया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 97 गवाह बनाए गए थे, जिनमें से 47 अहम गवाह अदालत में पेश किए गए।
गवाही की प्रक्रिया 28 मार्च, 2023 को शुरू हुई और दोनों पक्षों की बहस 19 मई, 2025 को समाप्त हुई, जब विशेष लोक अभियोजक अवनीश नेगी ने बचाव पक्ष की दलीलों का जवाब पेश किया। इसके बाद अदालत ने 30 मई को फैसला सुनाने की तारीख तय की थी।
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परिजनों की भावनाएं और जनता की नजरें :
अंकिता के पिता और परिवार की ओर से आरोपियों के लिए फांसी की सज़ा की मांग की गई है। उनका कहना है कि यह कोई साधारण अपराध नहीं, बल्कि इंसानियत और एक बेटी की गरिमा को कुचलने वाला कृत्य है। फैसले के दिन अदालत परिसर के बाहर भारी भीड़ और मीडिया का जमावड़ा देखा गया, जहां लोग ‘अंकिता को न्याय दो’ के नारे लगा रहे थे।

न्याय की उम्मीद, सज़ा की प्रतीक्षा :
अदालत द्वारा तीनों को दोषी करार देने के बाद अब सज़ा की घोषणा पर सबकी निगाहें हैं। जनता और पीड़िता के परिजन चाहते हैं कि सख्त से सख्त सजा देकर एक मिसाल कायम की जाए ताकि भविष्य में कोई भी बेटी इस तरह की हैवानियत का शिकार न हो।
यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि सत्ता, भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा से जुड़े बड़े सवालों का प्रतिनिधित्व करता है। अदालत का फैसला न्यायपालिका की पारदर्शिता और संवेदनशीलता का परिचायक बना है। अब देश इंतजार कर रहा है इंसाफ सिर्फ शब्दों में नहीं, सजा के स्वरूप में भी दिखे।
Editorial

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