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स्क्रीन की रोशनी में धुंधली हो रही बचपन की नजर..
By EditorialPublished on
इंदौर स्थित कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राजदीप जैन के अनुसार, बच्चों में डिजिटल आई स्ट्रेन और कंप्यूटर विजन सिंड्रोम जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चे औसतन 6 से 8 घंटे तक स्क्रीन पर समय बिताते हैं, जो कि आंखों के लिए खतरनाक हो सकता है।
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5/3/2025 4:52:35 PM
आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन और स्क्रीन आधारित गतिविधियां बच्चों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। ऑनलाइन शिक्षा, वीडियो गेम्स, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफार्म्स ने बच्चों के जीवन को आसान तो बना दिया है, लेकिन इनका अत्यधिक उपयोग उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। विशेष रूप से बच्चों की आंखों की सेहत पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है।
इंदौर स्थित कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राजदीप जैन के अनुसार, बच्चों में डिजिटल आई स्ट्रेन और कंप्यूटर विजन सिंड्रोम जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चे औसतन 6 से 8 घंटे तक स्क्रीन पर समय बिताते हैं, जो कि आंखों के लिए खतरनाक हो सकता है।
बच्चों में स्क्रीन टाइम के बढ़ते प्रभाव :
- आंखों में थकान और जलन: लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से आंखों में थकान और जलन की समस्या हो सकती है।
- आंखों का सूखापन: कम पलकें झपकाने के कारण आंखों में सूखापन और जलन हो सकती है।
- निकट दृष्टि दोष: ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों में मायोपिया यानी निकट दृष्टि दोष का खतरा बढ़ सकता है।
क्या हैं उपाय ?
- डॉ. राजदीप जैन के अनुसार, बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने के लिए कुछ आसान और प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं:
- संतुलित आहार: हरी सब्जियां, गाजर और आंवला बच्चों की आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।
- आउटडोर एक्टिविटी: बच्चों को बाहर खेलने का समय दें ताकि वे स्क्रीन से दूर रह सकें।
- स्क्रीन टाइम का नियंत्रण: बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें - 5 साल से छोटे बच्चों के लिए 1 घंटे और बड़े बच्चों के लिए 2 घंटे।
- 20-20-20 रूल: हर 20 मिनट में स्क्रीन से हटकर 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखे।
- आंखों की नियमित जांच: बच्चों की आंखों की साल में एक बार जांच जरूर कराएं।
बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम का अत्यधिक उपयोग एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। बच्चों की आंखों की सुरक्षा के लिए माता-पिता को सतर्क रहना चाहिए और उचित कदम उठाने चाहिए। बच्चों को स्वस्थ और सुरक्षित जीवन देने के लिए हमें स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना होगा और उनकी आंखों का सही देखभाल सुनिश्चित करनी होगी।
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