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लोकलसर्किल्स द्वारा किए गए ताजा सर्वे में यह बात सामने आई है कि भारत के कई ऑनलाइन सेक्टर्स में डार्क पैटर्न का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। यह पैटर्न यूजर्स को अनजाने में ऐसे फैसले लेने पर मजबूर करता है, जो वे सच में नहीं लेना चाहते। ट्रैवल, ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, ऑनलाइन बैंकिंग, पेमेंट ऐप्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म और टैक्सी ऐप्स में सबसे ज्यादा डार्क पैटर्न के मामले मिले हैं।
डार्क पैटर्न का मतलब और यूजर्स को कैसे फंसाया जाता है :
डार्क पैटर्न तकनीक के तहत यूजर्स को ऐसा डिज़ाइन किया गया इंटरफेस दिया जाता है जो उन्हें अपनी मर्जी के खिलाफ निर्णय लेने के लिए मजबूर करता है। सर्वे के अनुसार सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला डार्क पैटर्न है 'फोर्स्ड एक्शन' यानी जबरन कोई कदम उठाने को मजबूर करना। लगभग 54 से 123 फीसदी प्लेटफॉर्म इस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण के तौर पर, ट्रांजैक्शन के दौरान यूजर को किसी ऐप को डाउनलोड करने या पर्सनल डिटेल्स देने के लिए दबाव डाला जाता है।
इसके अलावा, 48 फीसदी प्लेटफॉर्म ‘ड्रिप प्राइसिंग’ का उपयोग करते हैं, जिसमें लेन-देन के अंतिम चरण में छिपे हुए अतिरिक्त चार्ज जोड़े जाते हैं। इसके अलावा, 33 फीसदी प्लेटफॉर्म यूजर्स को लालच देकर फंसा रहे हैं, जबकि 34 फीसदी ‘सब्सक्रिप्शन ट्रैप’ में फंसाने की रणनीति अपनाते हैं। लगभग 25 फीसदी इंटरफेस में बदलाव कर यूजर्स को भ्रमित करते हैं और 22 फीसदी ‘कन्फर्म शेमिंग’ यानी यूजर को गलत निर्णय लेने के लिए मानसिक दबाव देते हैं।
रेगुलेटर्स की गाइडलाइंस का कोई असर नहीं :
सर्वे में यह भी बताया गया है कि तमाम सरकारी गाइडलाइंस और नियम होने के बावजूद डार्क पैटर्न के इस्तेमाल में कोई कमी नहीं आई है। यूजर्स को बार-बार एक ही बात कहकर या अनजाने में फंसाया जाता है, जिससे उन्हें लगता है कि उन्हें किसी खास चीज की बहुत जरूरत है या वे आगे चलकर नुकसान में रहेंगे। इस तरह कई डिजिटल कंपनियां चालाकी से यूजर्स का फायदा उठा रही हैं।
किस सेक्टर में कितना डार्क पैटर्न ?
एडटेक, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-कॉमर्स, ओटीटी, टैक्सी ऐप, फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स, मेडिसिन, हेल्थ सर्विसेज, एयरलाइंस और मूवी/इवेंट टिकटिंग जैसे सेक्टर में सात या उससे अधिक डार्क पैटर्न पाए गए हैं।
टेलीकॉम, ऑनलाइन गेमिंग, डिजिटल लेंडिंग, वॉयस असिस्टेंट, ऑनलाइन बीमा और भर्ती/पेशेवर नेटवर्किंग में चार से छह डार्क पैटर्न मिले।
ट्रेन टिकटिंग, कार रेंटल, म्यूजिक स्ट्रीमिंग, मोबाइल डिवाइस, ऑनलाइन फाइनेंशियल ट्रेडिंग और इलेक्ट्रिक स्कूटर जैसे सेक्टर में एक से तीन डार्क पैटर्न की पहचान हुई।
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यूजर्स की शिकायतें और संख्या :
सर्वे में देश के 392 जिलों के 2.3 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने हिस्सा लिया। 228 भारतीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर डार्क पैटर्न पाए जाने की बात कही गई। इससे स्पष्ट है कि यूजर्स को ऑनलाइन धोखा देने की इस रणनीति से बचना कितना मुश्किल होता जा रहा है।
डार्क पैटर्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की एक छिपी हुई चाल है, जो यूजर्स को उनकी सहमति के बिना ही निर्णय लेने पर मजबूर करती है। इसे रोकने के लिए जरूरी है कि सरकार और रेगुलेटर्स कड़े नियम बनाएं और कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करें। साथ ही यूजर्स को भी सतर्क रहना होगा और बिना पूरी जानकारी के कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। डिजिटल दुनिया में सचेत और जागरूक रहना ही सुरक्षित रहने का सबसे बड़ा हथियार है।
Editorial

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