ट्रंप का सीजफायर का दावा बेबुनियाद; विदेश मंत्रालय का खंडन
भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा (LoC) पर सीजफायर समझौते को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन द्वारा लगातार किए जा रहे दावों को एक बार फिर भारत ने सख्ती से खारिज कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सीजफायर समझौता भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों — डीजीएमओ स्तर पर आपसी संवाद से हुआ था, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या दबाव में।
अमेरिका को नहीं मिला सीजफायर का क्रेडिट :
अमेरिकी ट्रंप प्रशासन की ओर से बार-बार यह दावा किया जा रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच फरवरी 2021 में हुआ सीजफायर अमेरिकी दबाव और टैरिफ रणनीति का परिणाम था। हाल ही में एक अमेरिकी कोर्ट में ट्रंप प्रशासन के अधिकारी हॉवर्ड लुटनिक ने कहा कि यदि अमेरिका की टैरिफ लगाने की शक्तियों को कम किया जाता है, तो भारत-पाक सीजफायर टूट सकता है। इस बयान के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सीजफायर पर बातचीत के दौरान व्यापार या टैरिफ जैसे मुद्दे कभी नहीं उठे।
'सीजफायर भारत-पाक के बीच आपसी सहमति से हुआ' :
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा, "सीजफायर पर बातचीत पूरी तरह से भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच हुई थी। इसमें अमेरिका या किसी अन्य देश की कोई भूमिका नहीं थी।" उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की विदेश नीति में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता या हस्तक्षेप का कोई स्थान नहीं है।
'PoK खाली करने के बाद ही होगी बात' :
रणधीर जायसवाल ने जम्मू-कश्मीर को लेकर भी भारत का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान PoK (पाक अधिकृत कश्मीर) खाली नहीं करता और उसे भारत को सौंप नहीं देता, तब तक जम्मू-कश्मीर पर कोई बातचीत नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान को पहले आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कदम उठाने होंगे।
उन्होंने कहा, "आतंक और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते। हमें पाकिस्तान से पहले उन कुख्यात आतंकियों को सौंपने की उम्मीद है, जिनकी सूची हमने उन्हें पहले ही दी है।"
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'आतंक और व्यापार भी एक साथ नहीं चल सकते' :
भारत ने सिंधु जल संधि पर भी रुख स्पष्ट किया है। मंत्रालय ने कहा कि यह संधि तब तक प्रभाव में नहीं आएगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को दोहराते हुए कहा, "जैसे आतंक और वार्ता साथ नहीं चल सकते, वैसे ही आतंक और व्यापार भी साथ नहीं चल सकते।"
ईरान में लापता भारतीयों पर चिंता :
वहीं, विदेश मंत्रालय ने ईरान में लापता तीन भारतीय नागरिकों के मुद्दे पर भी बयान जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि ये लोग हाल ही में तेहरान पहुंचे थे और तभी से लापता हैं। भारत ने ईरानी अधिकारियों के साथ संपर्क साधा है और उन्हें पूरा सहयोग मिल रहा है। मंत्रालय ने कहा कि वे इन नागरिकों की सुरक्षा और जल्द वापसी सुनिश्चित करने के लिए परिवारों के संपर्क में हैं और हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
भारत ने अमेरिका और पाकिस्तान दोनों को स्पष्ट संदेश दे दिया है – सीजफायर पर कोई विदेशी दबाव नहीं था, और जब तक पाकिस्तान आतंकवाद नहीं छोड़ता और PoK भारत को नहीं सौंपता, तब तक किसी भी तरह की वार्ता संभव नहीं है। भारत का यह रुख उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर अडिग नीति को दर्शाता है।
Editorial

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