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Caste Census 2025 : Supriya Sule ने विपक्षी एकता पर दिया बड़ा संकेत
By EditorialPublished on
बारामती से लोकसभा सांसद और NCP (शरद पवार गट) की नेता सुप्रिया सुले (Supriya Sule) ने जातीय जनगणना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह जनगणना इंडिया गठबंधन की प्रमुख मांगों में से एक थी, और अब सरकार ने इसे मंजूर कर लिया है। सुप्रिया सुले ने इसे विपक्ष की बड़ी जीत बताया और कहा कि यह कदम सामाजिक न्याय और समान प्रतिनिधित्व की दिशा में एक अहम साबित होगा।
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लोकसभा चुनाव 2024 की सरगर्मी के बीच जातीय जनगणना एक बार फिर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनकर सामने आया है। इस मुद्दे पर अब बारामती से लोकसभा सांसद और NCP (शरद पवार गट) की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जातीय जनगणना की मांग INDIA गठबंधन की ओर से उठाई गई थी और अब यह मांग पूरी हो गई है।
क्या कहा सुप्रिया सुलेने (Supriya Sule)?
सुप्रिया सुले ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "हमने लगातार जातीय जनगणना की मांग की थी। यह केवल एक राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशिता की दिशा में एक आवश्यक कदम था। आज यह मांग पूरी हुई है, और हम इसका स्वागत करते हैं। यह INDIA गठबंधन की एक बड़ी जीत है।" उन्होंने कहा कि इससे हाशिए पर पड़े वर्गों की सही स्थिति सामने आएगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
क्यों अहम है जातीय जनगणना ?
जातीय जनगणना को लेकर लंबे समय से विपक्षी दल सरकार पर दबाव बना रहे थे। उनका तर्क था कि पिछड़े वर्गों की सटीक संख्या और सामाजिक स्थिति का पता चलने से नीतियों को बेहतर ढंग से तैयार किया जा सकता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस मांग को अपने चुनावी एजेंडे का प्रमुख हिस्सा बनाया था।
INDIA गठबंधन की भूमिका :
INDIA गठबंधन, जिसमें कांग्रेस, NCP (शरद पवार गट), Shivasena (उद्धव ठाकरे गट), समाजवादी पार्टी, RJD, DMK समेत कई दल शामिल हैं, ने जातीय जनगणना को सामाजिक न्याय का आधार बताया। सुप्रिया सुले का यह बयान न केवल इस मुद्दे पर गठबंधन की एकजुटता को दिखाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले चुनावों में यह एक प्रमुख मुद्दा बना रहेगा।
जानते है सरकार का रुख :
हालांकि केंद्र सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार जातीय जनगणना को लेकर सरकार सकारात्मक रुख अपनाने को तैयार है, खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बढ़ते सामाजिक दबाव को देखते हुए।

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