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ड्रैगन की ढाल; Pak ने Chinese Missile System से कसा सुरक्षा घेरा
By EditorialPublished on
पहलगाम में हुए हालिया आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर से गहराता जा रहा है। इस हमले ने न सिर्फ दोनों देशों के रिश्तों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि सुरक्षा तैयारियों को भी नए स्तर पर पहुंचा दिया है। पाकिस्तान ने एहतियातन अपने हवाई क्षेत्र को भारतीय विमानों के लिए बंद कर दिया है, जिससे सीमा पार तनातनी और भी अधिक गंभीर होती जा रही है।

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पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के विमानों के लिए अपने-अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसी बीच पाकिस्तान ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए एयरस्पेस में जैमर (Jammers) और चीन से आयातित एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम (Chinese Air Defense Missile System) की तैनाती कर दी है।
भारत का करारा जवाब: पाक विमानों पर प्रतिबंध :
पाकिस्तान द्वारा भारतीय उड़ानों पर प्रतिबंध लगाने के कुछ ही दिन बाद भारत ने भी कड़ा कदम उठाते हुए 30 अप्रैल से 23 मई 2025 तक पाकिस्तानी स्वामित्व वाली और संचालित उड़ानों को अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश से रोक दिया है। इसके लिए भारत सरकार ने NOTAM (Notice to Airmen) जारी किया है, जिसमें स्पष्ट रूप से पाक विमानों के भारतीय क्षेत्र में प्रवेश पर प्रतिबंध की जानकारी दी गई है।
पाकिस्तान की तैयारी: जैमर और मिसाइल तैनात :
पाकिस्तान ने भारत की संभावित एयरस्ट्राइक से बचाव के लिए अपने एयरस्पेस में हाई-पावर जैमर तैनात कर दिए हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान ने चीन में निर्मित आधुनिक विमानरोधी मिसाइल सिस्टम भी एलओसी के आसपास तैनात किए हैं। यह तैनाती भारतीय वायुसेना की किसी भी कार्रवाई को रोकने के इरादे से की गई है।
एलओसी पर लगातार गोलीबारी, तनाव बढ़ा :
इस बीच नियंत्रण रेखा (LoC) पर भी हालात गंभीर होते जा रहे हैं। पाकिस्तान ने लगातार सातवें दिन संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है। 30 अप्रैल और 1 मई की रात पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा, उरी और अखनूर सेक्टर में अकारण फायरिंग की। भारतीय सेना ने भी हर बार इसका मुंहतोड़ जवाब दिया है।
भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहा यह तनाव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। दोनों देशों की वायु सीमाएं बंद होने से अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि यह स्थिति आगे और बिगड़ सकती है अगर कूटनीतिक स्तर पर समाधान नहीं निकाला गया।
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