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Pahalgam Attack में Adil शहीद; भाई ने बताई आपबीती
By EditorialPublished on
22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले सैयद आदिल हुसैन शाह को अब बहादुरी की मिसाल के रूप में याद किया जा रहा है। चश्मदीदों के मुताबिक, आदिल ने हमले के दौरान आतंकियों से भिड़ने की कोशिश की थी और उनका हथियार छीनने का प्रयास किया। इसी दौरान उन्होंने अपनी जान गंवा दी, लेकिन उनकी यह दिलेरी सभी को हैरान कर गई। अब लोग उन्हें वीर नागरिक कहकर सलाम कर रहे हैं।
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22 अप्रैल को कश्मीर के पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हमले में जान गंवानेवाले सैयद आदिल हुसैन शाह अब बहादुरी और कश्मीरियत की पहचान बन चुके हैं। पर्यटकों की जान बचाने की कोशिश में आदिल ने आतंकियों से भिड़ते हुए अपनी जान गंवाई। अब सरकार और समाज की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी है।
भाई को मिली सरकारी नौकरी :
जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष डॉ. दरख्शां अंद्राबी ने गुरुवार, 1 मई को आदिल हुसैन शाह के भाई नजाकत अहमद को नियुक्ति पत्र सौंपा। आदिल परिवार में इकलौते कमाने वाले थे और उनके निधन के बाद परिवार आर्थिक संकट में आ गया था। अब वक्फ बोर्ड ने उनके भाई को नौकरी देकर आदिल की शहादत को सलाम किया है। "उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा" — वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. अंद्राबी ने मीडिया से बात करते हुए कहा: “आदिल ने जो बलिदान दिया है, वह कश्मीर की असली पहचान है। उनके परिवार को सम्मान देना हमारा कर्तव्य है। उनका बलिदान कभी भुलाया नहीं जाएगा।” "भाई ने जान देकर लोगों की जान बचाई" — नजाकत अहमद नियुक्ति पत्र मिलने के बाद नजाकत अहमद ने भावुक होते हुए कहा: “मेरे भाई ने अपनी जान देकर उन लोगों को बचाया, जिनसे उसका कोई निजी रिश्ता नहीं था। यह हमारे लिए गर्व की बात है। मैं आज जहां हूं, वो मेरे भाई के कारण हूं।”
मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि, महाराष्ट्र से भी मदद :
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में आदिल के नाम पर श्रद्धांजलि अर्पित की थी। उन्होंने कहा कि कश्मीर को आदिल जैसे बेटों पर गर्व है। इसके साथ ही महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने आदिल के परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी और परिवार के लिए घर बनवाने का प्रस्ताव भी रखा।
आदिल: सिर्फ एक टट्टू वाला नहीं, बहादुरी का प्रतीक :
आदिल पेशे से एक घोड़ा-पालक (टट्टू वाला) था, जो पर्यटकों को पहाड़ों में सैर कराता था। लेकिन आतंकियों के सामने खड़े होकर उसने जो साहस दिखाया, वो किसी कमांडो से कम नहीं था। उन्होंने न सिर्फ हथियार छीनने की कोशिश की बल्कि पर्यटकों को हमले के बीच सुरक्षित करने का प्रयास किया। आदिल हुसैन शाह की शहादत ने यह दिखा दिया कि कश्मीर केवल हिंसा की नहीं, मेहमाननवाज़ी, दिलेरी और इंसानियत की भी ज़मीन है। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन चुका है।

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