देश को हिला देने वाले 2006 के बहुचर्चित निठारी सीरियल किलिंग केस में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने मुख्य आरोपी को बरी करते हुए आदेश दिया कि यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है, तो उसे तुरंत रिहा किया जाए। यह निर्णय उस समय आया है जब आरोपी पहले ही निठारी हत्याकांड से जुड़े कई अन्य मामलों में अदालतों से बरी हो चुका है।

यह मामला एक समय पूरे देश में भय और आक्रोश का प्रतीक बन गया था, जब नोएडा के निठारी गांव में बच्चों के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के कई मामलों ने देश को झकझोर दिया था। पुलिस ने मामले की जांच के बाद कई कंकाल बरामद किए थे, जिससे इस कांड को भारत के सबसे भयानक आपराधिक मामलों में गिना गया।

हाईकोर्ट ने पहले ही पलटा था निचली अदालत का फैसला :

अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालतों के फैसलों को पलटते हुए आरोपी को बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा है। इसके बाद सीबीआई और पीड़ित परिवारों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन शीर्ष अदालत ने 30 जुलाई 2025 को सभी 14 अपीलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि यदि आरोपी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है, तो उसे तुरंत रिहा किया जाए।

“झूठे सबूतों से बनाया गया मोहरा” बचाव पक्ष का दावा

बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में दलील दी कि 19 वर्षों तक चले इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष एक भी ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। वकील के अनुसार, जिन 13 मामलों में आरोपी को पहले मौत की सजा दी गई थी, उनमें से 12 में वह पहले ही निर्दोष साबित हो चुका था। अंतिम मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने अब उसकी बरी का आदेश दे दिया है। बचाव पक्ष का कहना है कि जांच एजेंसियों ने किसी “ताकतवर व्यक्ति” को बचाने के लिए एक निर्दोष को फंसाया और सबूतों को गढ़ा।

निठारी कांड : एक ऐसा मामला जिसने न्याय व्यवस्था पर छोड़े गहरे सवाल

यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि न्यायिक प्रणाली और जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न उठाता है। करीब दो दशक बाद जब अदालत ने आरोपी को बरी किया, तो एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई कि क्या देश की जांच प्रणाली ऐसे मामलों में निष्पक्ष रह पाती है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अब न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय भी जोड़ता है — जहां भयावह अपराध और न्याय की जटिल प्रक्रिया, दोनों ने देश की संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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