Nithari Killings Case : 29 दिसंबर 2006 यह वह तारीख थी जब नोएडा के शांत माने जाने वाले निठारी गांव में एक ऐसा रहस्य उजागर हुआ जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। एक व्यवसायिक घराने के पीछे बने नाले से जब पुलिस ने बच्चों के कंकाल बरामद किए, तो मामला धीरे-धीरे देश के सबसे भयावह अपराधों में से एक बन गया। इस खुलासे ने न केवल समाज को झकझोरा, बल्कि देश की कानून व्यवस्था और जांच एजेंसियों पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए।

जांच के शुरुआती दिनों में पुलिस ने एक नौकर को गिरफ्तार किया, जिस पर आरोप था कि उसने बच्चों को अगवा कर उनके साथ दुष्कर्म किया और फिर हत्या कर शवों को नाले में फेंक दिया। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि यह कोई एक घटना नहीं, बल्कि कई बच्चों और युवतियों के साथ हुई क्रूर घटनाओं की लंबी श्रृंखला थी।

2007 में मामला और गंभीर हुआ जब जांच एजेंसी ने इसे सीरियल किलिंग का रूप मानते हुए विस्तृत जांच शुरू की। इस बीच, देश भर में इस घटना को लेकर भय और आक्रोश का माहौल था। हर घर में यही सवाल उठ रहा था — आखिर कैसे इतने लंबे समय तक किसी ने इस दरिंदगी को नहीं देखा?

फरवरी 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा। अदालत ने इसे “मानवता को झकझोर देने वाला अपराध” करार दिया था। आरोपी को 15 वर्षीय लड़की के अपहरण, बलात्कार और हत्या के मामले में दोषी पाया गया था। बाद में 2014 में उसकी पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी गई।

हालांकि, जनवरी 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में एक अहम फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि दोषी की दया याचिका पर फैसला लेने में अत्यधिक देरी की गई, जो कि संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन है। इस आधार पर कोर्ट ने मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया।

यह मामला वर्षों तक अदालतों में चलता रहा, और हर सुनवाई के साथ इसने न्याय व्यवस्था, जांच की निष्पक्षता और प्रशासनिक जवाबदेही पर नए प्रश्न खड़े किए। निठारी कांड ने यह दिखाया कि समाज के बीच रहने वाला एक अपराधी कितनी देर तक भयावह अपराधों को अंजाम दे सकता है, और न्याय पाने में कितनी लंबी लड़ाई लड़ी जाती है।

आज, लगभग दो दशक बाद भी यह मामला भारत के आपराधिक इतिहास के सबसे भयानक अध्यायों में से एक बना हुआ है एक ऐसी कहानी जिसमें बच्चों की चीखें, प्रशासन की चुप्पी और न्याय की लंबी प्रतीक्षा, तीनों हमेशा याद रखी जाएंगी।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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