हिमालयी आपदा प्रबंधन में एआई का उपयोग जरूरी: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन
दून विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक और स्थानीय भागीदारी आवश्यक है।
दून विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल।
देहरादून, 15 अक्टूबर 2026। जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती चुनौतियों, आपदाओं के आकलन और जोखिम कम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का प्रभावी उपयोग महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके साथ ही सतत विकास की योजनाओं में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है। मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को दून विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए यह बात कही।
“बदलती जलवायु में हिमालयः आपदाएं, सतत विकास एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में मुख्य सचिव ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आपदाओं के आकलन, उनके संभावित प्रभावों का पूर्वानुमान लगाने और प्रभावी योजनाएं तैयार करने में नवीन तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि तकनीक आधारित समाधान स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप होने चाहिए, ताकि उनका लाभ आमजन तक पहुंच सके।
संगोष्ठी में दक्षिण कैरोलिना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तथा आईएआईआरओ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं संस्थापक निदेशक प्रो. अमित शेठ ने एआई की उभरती तकनीक ‘स्मॉल एआई’ की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कम संसाधनों में सुलभ और प्रभावी तकनीकी समाधान विकसित करके भारत की विशिष्ट विकास संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। हिमालयी क्षेत्र में लगातार सामने आने वाली आपदाओं की चुनौतियों से निपटने में भी इन तकनीकों का उपयोग महत्वपूर्ण हो सकता है।
अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के संयुक्त सचिव डॉ. निशांत वर्मा ने दून विश्वविद्यालय में विकसित हो रहे शोध एवं अनुसंधान के वातावरण की सराहना की। उन्होंने देश में अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और शोध के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में एएनआरएफ की भूमिका पर प्रकाश डाला।
दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध संबंधी उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों और शोधार्थियों के प्रयासों से अनुसंधान गतिविधियों को लगातार सशक्त किया जा रहा है।
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में उत्पन्न हो रहे खतरों, आपदा आकलन एवं जोखिम न्यूनीकरण, सतत विकास की संभावनाओं तथा शोध, नियोजन और निर्णय प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर विशेषज्ञों के व्याख्यान और परिचर्चाएं आयोजित की जाएंगी।
संगोष्ठी में दिल्ली विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की सहित देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और दून विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में संगोष्ठी के संयोजक एवं भूविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विपिन कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हिमालयी चुनौतियों के समाधान के लिए आयोजित यह संगोष्ठी आपदा जोखिम कम करने, सतत विकास की योजनाओं को स्थानीय जरूरतों से जोड़ने और शोध एवं निर्णय प्रक्रिया में एआई के उपयोग पर विशेषज्ञों के विचार साझा करने का मंच बनी है।