तस्वीर में मुजफ्फरनगर में कुशवाहा आई हॉस्पिटल के बाहर महिला की मौत के मामले में प्रदर्शन करते परिजन और पुलिसकर्मी नजर आ रहे हैं।

मुजफ्फरनगर में सर्कुलर रोड स्थित कुशवाहा आई हॉस्पिटल में आंख के ऑपरेशन के बाद 67 वर्षीय महिला बाला देवी की मौत का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया से शिकायत के बाद बुधवार देर रात डिप्टी सीएमओ डॉ. महक सिंह की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम अस्पताल पहुंची और मामले की जांच शुरू की। वहीं, परिजनों ने मृतका का पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया और शव का अंतिम संस्कार कर दिया।

चरथावल थाना क्षेत्र के गांव हैबतपुर निवासी बाला देवी की आंख से काफी दिनों से पानी बहने की समस्या थी। उनके पति सीताराम सैनी के अनुसार, उपचार के लिए उन्होंने पत्नी को सर्कुलर रोड स्थित कुशवाहा आई हॉस्पिटल में दिखाया था। चिकित्सकों के परामर्श के बाद बुधवार को बाला देवी को आंख के ऑपरेशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विनोद कुशवाहा ने बाला देवी की आंख का ऑपरेशन किया। सीताराम सैनी का आरोप है कि ऑपरेशन के तुरंत बाद अस्पताल के कंपाउंडर ने उनके मना करने के बावजूद बाला देवी को एक इंजेक्शन लगा दिया। इसके कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।

महिला की हालत बिगड़ते देख घबराए परिजन उन्हें तत्काल पास स्थित डॉ. राकेश अहलावत के नर्सिंग होम लेकर पहुंचे। वहां भी उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने बाला देवी को मेरठ के हायर सेंटर रेफर कर दिया। परिजन उन्हें मेरठ लेकर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कुशवाहा आई हॉस्पिटल पहुंचकर हंगामा किया। परिजनों ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया को लिखित शिकायत दी। शिकायत में कंपाउंडर पर मना करने के बावजूद गलत इंजेक्शन लगाने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि महिला की मौत गलत इंजेक्शन के कारण हुई या यह एनाफिलेक्सिस रिएक्शन का मामला था

सीएमओ के कड़े निर्देश पर बुधवार रात डिप्टी सीएमओ डॉ. महक सिंह के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम कुशवाहा आई हॉस्पिटल पहुंची। डॉ. महक सिंह ने बताया कि पीड़ित पक्ष से लिखित शिकायत ले ली गई है। उन्होंने बताया कि परिजनों ने पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया है। ऐसे में उपलब्ध साक्ष्यों और प्राप्त शिकायत के आधार पर मामले की प्रशासनिक जांच शुरू की जा रही है।

पोस्टमॉर्टम नहीं होने के कारण जांच में उपलब्ध साक्ष्यों और शिकायत को आधार बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही यह स्पष्ट होने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा कि महिला की मौत के पीछे लगाए गए गलत इंजेक्शन के आरोप की क्या स्थिति है।

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