मुरैना कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी तीन बेटियों के साथ बैठी और जमीन पर घिसटकर मदद मांगने आई बीमार महिला रानी वाल्मीकि       

मुरैना में तीन बेटियों के भरण-पोषण और सिर पर छत की उम्मीद लेकर कलेक्ट्रेट पहुंची एक बीमार मां की परेशानी उस समय और बढ़ गई, जब प्रशासन से फरियाद करने की कोशिश के बीच वह आवारा कुत्ते के हमले में घायल हो गई। शारीरिक रूप से काम करने में असमर्थ होने के बावजूद महिला ने हार नहीं मानी। अगले दिन वह अपनी तीनों बेटियों के साथ कमर के बल घिसटते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंची और आर्थिक सहायता व आवास की गुहार लगाई।

मामला शहर की सिंगल बस्ती में रहने वाली रानी वाल्मीकि का है। रानी ने अपने आवेदन में बताया कि उसके पति नशे के आदी हैं और परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी नहीं निभाते। वह खुद भी बीमारी से परेशान है और शारीरिक रूप से काम करने में असमर्थ है। ऐसे में तीन बेटियों की परवरिश करने और घर का खर्च चलाने में उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

रानी के मुताबिक, आर्थिक तंगी के चलते मकान का 10 महीने का किराया बकाया हो गया है। उसका आरोप है कि मकान मालिक उसे घर से निकालने और सामान सड़क पर फेंकने की धमकी दे रहा है। इससे परिवार के सामने रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। इसी संकट से निकलने और अपनी बेटियों के लिए सुरक्षित छत का इंतजाम करने की उम्मीद में वह प्रशासन से मदद मांगने पहुंची थी, लेकिन कलेक्ट्रेट आने से पहले आवारा कुत्ते के हमले में घायल हो गई।

घायल होने के बावजूद रानी ने अपनी परेशानी प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास जारी रखा। अगले दिन वह अपनी तीनों बेटियों को साथ लेकर कमर के बल घिसटते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंची। महिला की स्थिति सामने आने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर उसे अस्पताल में इंजेक्शन लगवाए गए।

अब रानी ने प्रशासन से आर्थिक सहायता और आवास उपलब्ध कराने के साथ अपनी बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए मदद की मांग की है। बीमारी, आर्थिक तंगी, पति की ओर से भरण-पोषण की जिम्मेदारी नहीं निभाने और 10 महीने के बकाया किराये के बीच परिवार के सामने आवास का संकट बना हुआ है। ऐसे में रानी वाल्मीकि और उसकी तीन बेटियों को तत्काल राहत मिलने के साथ स्थायी सहारा कब मिल पाएगा, यह अहम सवाल है।A

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