हापुड़ साहित्य समिति की बैठक में ‘साहित्यम’ स्मारिका का लोकार्पण, महापर्व पर मंथन
हापुड़ साहित्य समिति की आम बैठक में ‘साहित्यम’ स्मारिका का लोकार्पण हुआ। बैठक में युवा रचनाकारों को मंच से जोड़ने पर जोर दिया गया।
तस्वीर में हापुड़ साहित्य समिति की बैठक के दौरान स्मारिका का लोकार्पण करते लोग दिख रहे हैं।
हापुड़ (उत्तर प्रदेश) में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित हापुड़ साहित्य समिति की महत्वपूर्ण आम बैठक शनिवार को प्रयाग हॉस्पिटल के प्रांगण में आयोजित हुई। साहित्यिक वातावरण में हुई इस बैठक का मुख्य आकर्षण ‘साहित्यम महापर्व 2025’ पर आधारित विशेष स्मारिका ‘साहित्यम’ का भव्य लोकार्पण रहा।
स्मारिका ‘साहित्यम’ का अनावरण समिति के संरक्षक डॉ. अशोक मैत्रेय, मार्गदर्शक डॉ. श्याम कुमार और अध्यक्ष इंदु मित्तल सहित उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं प्रबुद्ध सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे समिति के संरक्षक डॉ. अशोक मैत्रेय ने अपने संबोधन में साहित्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “साहित्य किसी भी जीवंत समाज की आत्मा होता है। यह समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को एक सूत्र में पिरोने का सबसे प्रभावी माध्यम है।”
डॉ. अशोक मैत्रेय ने हापुड़ साहित्य समिति के प्रयासों और ‘साहित्यम महापर्व’ के सफल आयोजनों की सराहना भी की। उन्होंने साहित्य की सामाजिक एवं सांस्कृतिक भूमिका को रेखांकित करते हुए समिति की गतिविधियों को महत्वपूर्ण बताया।
बैठक में मार्गदर्शक डॉ. श्याम कुमार ने क्षेत्रीय स्तर पर साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अधिक से अधिक नए और युवा रचनाकारों को समिति के मंच से जोड़ने की बात कही, ताकि उनकी प्रतिभा को निखारने का अवसर मिल सके।
कार्यक्रम का मंच संचालन समिति के महासचिव महेश वर्मा ने किया और बैठक को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया। आम बैठक में साहित्य, समाज और संस्कृति के बीच संबंधों को मजबूत करने तथा नए रचनाकारों को मंच से जोड़ने पर विशेष जोर रहा।
बैठक के अंत में यह संदेश दिया गया कि साहित्य समाज और संस्कृति को जोड़ने का सशक्त माध्यम है। ‘साहित्यम’ स्मारिका का लोकार्पण इसी साहित्यिक गतिविधि के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में सामने आया।