हापुड़ के कपूरपुर में आयोजित खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित लोग।

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के ग्राम कपूरपुर में मुख्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण एवं ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। विकासखंड धौलाना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाना और खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने पर ₹1 लाख का अनुदान मिलने की जानकारी दी गई।

राजकीय फल संरक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र, हापुड़ की ओर से आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन ग्राम कपूरपुर की ग्राम प्रधान एवं मुख्य अतिथि रिंकी तोमर ने फीता काटकर किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं से योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने और स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनने की अपील की।

कार्यक्रम में राजकीय फल संरक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र, हापुड़ के प्रभारी विजेंद्र सिंह ने ग्रामीणों को मुख्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण एवं ग्राम स्वरोजगार योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने पर सरकार की ओर से ₹1 लाख का अनुदान दिया जा रहा है। इस सहायता के माध्यम से ग्रामीणों को खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी गई।

विजेंद्र सिंह ने प्रशिक्षणार्थियों को फल एवं सब्जियों के संरक्षण के विभिन्न तरीकों के बारे में भी बताया। इसके साथ ही खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित छोटे उद्योग शुरू करने की बारीकियों और इस क्षेत्र में स्वरोजगार की संभावनाओं पर जानकारी साझा की गई। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को आवश्यक लेखन सामग्री (स्टेशनरी) भी वितरित की गई।

इस अवसर पर क्षेत्र के अनुभवी लोगों में सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य रमेश चंद्र, सेवानिवृत्त प्रभारी परविंदर कुमार और सेवानिवृत्त प्रभारी रूप किशोर शर्मा भी उपस्थित रहे। इन सभी ने ग्रामीणों का मार्गदर्शन किया और अपने लंबे अनुभवों को साझा करते हुए उन्हें स्वरोजगार तथा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

ग्राम कपूरपुर में आयोजित यह दो दिवसीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम ग्रामीणों को खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, फल एवं सब्जी संरक्षण और छोटे उद्योगों के संचालन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। कार्यक्रम को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में उत्साह देखने को मिल रहा है। योजना के तहत मिलने वाले ₹1 लाख के अनुदान की जानकारी ग्रामीणों के लिए स्वरोजगार के अवसरों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

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