हापुड़ में डीएम कविता मीना ने खेत में उतरकर कराई धान की क्रॉप कटिंग, किसानों से की पराली न जलाने की अपील
हापुड़ में जिलाधिकारी कविता मीना ने खेत में पहुंचकर धान की क्रॉप कटिंग का औचक निरीक्षण किया। 10x10 मीटर के रकबे में पैदावार की जांच के साथ किसानों को पराली न जलाने और आधुनिक कृषि यंत्रों के इस्तेमाल की अपील की।
हापुड़ में धान की फसल का निरीक्षण कर क्रॉप कटिंग करातीं डीएम कविता मीना।
हापुड़ में धान की फसल की वास्तविक पैदावार का आकलन करने के लिए जिलाधिकारी कविता मीना ने खेत में पहुंचकर क्रॉप कटिंग का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने राजस्व और कृषि विभाग की टीम की मौजूदगी में खुद धान की फसल कटवाकर उपज की पैमाइश कराई। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्धारित मानकों के अनुसार क्रॉप कटिंग की प्रक्रिया पूरी की।
जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना हापुड़ तहसील के अंतर्गत आने वाले एक गांव में पहुंचीं, जहां उन्होंने कृषि अधिकारियों के साथ खेत में खड़ी धान की फसल का निरीक्षण किया। इसके बाद खेत में निर्धारित मानकों के अनुसार 10x10 मीटर का रकबा चिह्नित कराया गया। चिह्नित क्षेत्र में खड़ी धान की फसल कटवाकर उसका वजन कराया गया। मौके पर मौजूद अधिकारियों के अनुसार, इस क्षेत्र में धान की पैदावार काफी अच्छी पाई गई।
क्रॉप कटिंग की प्रक्रिया के दौरान जिलाधिकारी ने राजस्व और कृषि विभाग की टीम को निर्देश दिए कि पूरा कार्य पारदर्शिता के साथ निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि क्रॉप कटिंग के माध्यम से जिले में होने वाले वास्तविक कृषि उत्पादन के सटीक आंकड़े शासन तक पहुंचेंगे। इससे उत्पादन के सही आंकड़ों का रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी। साथ ही, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत स्थानीय किसानों को फसल नुकसान या बीमा दावों का सही और समय पर लाभ मिल सकेगा।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी कविता मीना ने गांव के किसानों से सीधे संवाद भी किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए किसानों से धान की कटाई के बाद खेतों में पराली नहीं जलाने की अपील की।
उन्होंने किसानों से कहा कि पराली को नष्ट करने या उसका उचित उपयोग करने के लिए सरकार की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे आधुनिक कृषि यंत्रों का इस्तेमाल करें। पराली जलाने के बजाय उसके बेहतर प्रबंधन पर जोर देते हुए उन्होंने किसानों से पर्यावरण और कृषि भूमि की गुणवत्ता को सुरक्षित रखने में सहयोग करने की अपील की।
इस अवसर पर तहसील प्रशासन, राजस्व विभाग और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय किसान मौजूद रहे। जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान क्रॉप कटिंग की प्रक्रिया, वास्तविक उत्पादन के आंकड़ों की पारदर्शिता और किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ सुनिश्चित करने के साथ-साथ पराली प्रबंधन को लेकर प्रशासन की प्राथमिकताएं सामने आईं।