अमेठी के 72 सरकारी स्कूलों में ‘लर्निंग बाय डूइंग’ लैब शुरू, प्रयोगों से पढ़ाई बन रही अधिक रोचक
अमेठी के 72 परिषदीय विद्यालयों में ‘लर्निंग बाय डूइंग’ लैब के जरिए बच्चे प्रयोगों से सीख रहे हैं। जानिए कैसे बदल रही है सरकारी स्कूलों की पढ़ाई।
तस्वीर में दिख रही छात्राएं स्कूल की मेज पर रंगीन कागज, कैंची और धागे का उपयोग करके गतिविधि आधारित मॉडल बनाती हुईं।
अमेठी जिले के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई को अधिक रोचक और व्यावहारिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। अब सरकारी स्कूलों के बच्चे केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से विषयों को समझ रहे हैं। जिले के 72 परिषदीय विद्यालयों में ‘लर्निंग बाय डूइंग’ (Learning by Doing) लैब संचालित की जा रही हैं।
इन लैब का उद्देश्य विद्यार्थियों में तार्किक, वैज्ञानिक और तकनीकी सोच विकसित करना है। यहां बच्चों को मापन, मिश्रण, मॉडल निर्माण और विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों के साथ इंजीनियरिंग, कृषि, फूड प्रोसेसिंग तथा विद्युतीकरण जैसी गतिविधियों के जरिए विषयों की व्यवहारिक जानकारी दी जा रही है। राज्य स्तर पर प्रशिक्षित शिक्षक ‘आओ करके सीखें’ पद्धति के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं, जिससे उनकी जिज्ञासा, रचनात्मकता और सीखने की क्षमता को बढ़ावा मिल रहा है।
केंद्रीय भंडारण निगम की ओर से प्रत्येक लैब के लिए 155 प्रकार की शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त स्थानीय स्तर पर आवश्यक सामग्री की खरीद के लिए प्रत्येक विद्यालय को स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के माध्यम से करीब 60 हजार रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है।
जिले में पहले चरण के तहत 27 विद्यालयों में ‘लर्निंग बाय डूइंग’ लैब स्थापित की गई थीं। इसके बाद दूसरे चरण में 45 और विद्यालयों को इस योजना में शामिल किया गया। इस प्रकार वर्तमान में जिले के कुल 72 विद्यालयों में इन लैब का संचालन किया जा रहा है।
इन विद्यालयों में 13 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, 5 पीएम श्री विद्यालय तथा अन्य उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालय शामिल हैं। विद्यालयों का चयन गणित एवं विज्ञान शिक्षकों की उपलब्धता, विद्युतीकरण और चारदीवारी जैसी मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखकर किया गया है।
लैब में आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों की तस्वीरें नियमित रूप से प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड की जा रही हैं। इसके माध्यम से विद्यालयों में संचालित गतिविधियों की निगरानी और उनके मूल्यांकन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने बताया कि ‘लर्निंग बाय डूइंग’ लैब के माध्यम से बच्चे अब विषयों को केवल पढ़ नहीं रहे, बल्कि स्वयं प्रयोग करके समझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई में रुचि बढ़ी है, उनका आत्मविश्वास मजबूत हुआ है और शिक्षा की गुणवत्ता में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जिले में शुरू की गई यह पहल सरकारी विद्यालयों में व्यवहारिक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।