प्राचीन भारत के ज्ञान और नालंदा के इतिहास पर जगदीश सिंह राव ने विद्यार्थियों को बताया गौरव
चंगेड़ी में जगदीश सिंह राव ने प्राचीन भारत, नालंदा और शीलभद्र से जुड़े प्रसंगों के जरिए विद्यार्थियों को ज्ञान परंपरा से अवगत कराया।
तस्वीर में मुख्य वक्ता जगदीश सिंह राव राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चंगेड़ी में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए नजर आ रहे हैं।
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चंगेड़ी में आयोजित युवा आधारित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता जगदीश सिंह राव ने प्राचीन भारत की समृद्ध शिक्षा परंपरा, प्राचीन विश्वविद्यालयों तथा ज्ञान-विज्ञान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को भारत के ‘विश्व गुरु’ होने से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों से अवगत कराया।
जगदीश सिंह राव ने कहा कि आज से लगभग 3000 वर्ष पूर्व भारत में विक्रमशिला और तक्षशिला जैसे महान विश्वविद्यालयों की स्थापना हो चुकी थी। ईसा पूर्व काल से ही ये विश्वविद्यालय अस्तित्व में थे, जहां लगभग 24 देशों के विद्यार्थी अध्ययन के लिए भारत आते थे। उन्होंने कहा कि जिस समय दुनिया के अन्य भागों में लोगों को रहन-सहन, खान-पान और वस्त्र पहनने तक का ज्ञान नहीं था, उस समय भारत ज्ञान का सबसे बड़ा केंद्र था। इसी कारण भारत को ‘विश्व गुरु’ कहा गया।
अपने संबोधन में राव ने नालंदा विश्वविद्यालय और चाणक्य जैसी महान विभूतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बख्तियार खिलजी और नालंदा के आचार्य एवं वैद्य शीलभद्र से जुड़ा एक रोचक ऐतिहासिक प्रसंग सुनाया।
राव ने बताया कि जब बख्तियार खिलजी गंभीर रूप से बीमार पड़ा और कोई हकीम या वैद्य उसे ठीक नहीं कर सका, तब नालंदा के आयुर्वेद विशेषज्ञ आचार्य शीलभद्र को बुलाया गया। खिलजी ने बिना कोई दवा खाए उसे ठीक करने की शर्त रखी और ऐसा नहीं होने पर मृत्युदंड की चेतावनी दी।
आचार्य शीलभद्र ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए दवा का एक तरल लेप तैयार किया और उसे ‘कुरान’ के पन्नों के किनारों पर लगा दिया। इसके बाद खिलजी को उस पुस्तक को प्रतिदिन तीन बार पढ़ने की सलाह दी गई। जब-जब खिलजी पन्ने पलटने के लिए अपनी उंगली पर थूक लगाता, दवा उसके शरीर में प्रवेश करती गई और कुछ ही दिनों में वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया।
राव ने आगे कहा कि स्वस्थ होने के बाद खिलजी इस बात को बर्दाश्त नहीं कर सका कि भारतीय ज्ञान और वैद्य परंपरा उसके हकीमों से श्रेष्ठ है। इसी ईर्ष्या और द्वेष के भाव में आकर बख्तियार खिलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय और उसके महान पुस्तकालय में आग लगवा दी, जिससे ज्ञान का एक अनमोल खजाना नष्ट हो गया।
उन्होंने अपने संबोधन के माध्यम से उपस्थित समूह को भारत की प्राचीन सनातन और शैक्षणिक विरासत को याद करने तथा उस पर गर्व करने का संदेश दिया।
कोटा करियर स्कूल में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां विभाग कार्यवाह हिम्मत सिंह राव का बौद्धिक हुआ, जिसमें उन्होंने कुटुंब प्रबोधन और पर्यावरण के प्रति जागरूकता विषय में युवाओं को अवगत कराया। विद्यालय के निदेशक शीशराम सैनी ने बताया कि अंग्रेजी माध्यम और हिंदी माध्यम की कक्षा 6 से 12 तक के लगभग 950 विद्यार्थियों ने इस युवा आधारित कार्यक्रम में भाग लिया।
लदानी में जितेंद्र नागदा, जिला प्रचार प्रमुख, का बौद्धिक हुआ। विभिन्न स्थानों पर आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं को भारत की प्राचीन ज्ञान, शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया गया।