पारसोला में पारंपरिक परिवेश में मना विश्व आदिवासी दिवस, लोकनृत्य के साथ निकली भव्य रैली
पारसोला में शनिवार को विश्व आदिवासी दिवस पारंपरिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। विधायक थावरचंद डामोर के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। लोकगीत, लोकनृत्य और बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद पुलिस थाना, सन्मति नगर, मांडवी चौराहा सहित प्रमुख मार्गों से भव्य जुलूस निकाला गया।
पारसोला में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पारंपरिक वेशभूषा में नाचते-झूमते हुए निकाला गया भव्य जुलूस, जिसमें क्षेत्रीय विधायक थावरचंद डामोर सहित सैकड़ों समाजजन शामिल हुए।
पारसोला। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर शनिवार को पारसोला ब्लॉक का आयोजन क्षेत्रीय विधायक थावरचंद डामोर के मुख्य आतिथ्य में पारंपरिक उत्साह और उल्लास के साथ हुआ। कस्बे के मुगाना रोड पर आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों आदिवासी समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। समाजजनों ने लोकगीत गाते हुए और लोकनृत्य करते हुए आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं की जीवंत झलक प्रस्तुत की।
कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित किया। मुख्य वक्ता विधायक थावरचंद डामोर सहित कांतिलाल रोत, सुनील मईड़ा, मुकेश बरोड़, अशोक भील, नरेश मचार, बबीता कश्यप एवं शंकरलाल मीणा ने संबोधित किया। वक्ताओं ने आदिवासी समाज के उत्थान, शिक्षा, संस्कृति और विकास के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के बाद विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में पारंपरिक वेशभूषा में नाचते-झूमते हुए भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस पुलिस थाना, सन्मति नगर, मांडवी चौराहा, स्वामी विवेकानंद चौक, पुराना बस स्टैंड एवं साबला मार्ग से होकर चामुंडा माता मंदिर पहुंचा, जहां इसका समापन हुआ। जुलूस के मार्ग में सर्व समाज की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
इस दौरान विधायक थावरचंद डामोर ने राणा पूंजा सर्कल पहुंचकर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम एवं जुलूस के दौरान पुलिस प्रशासन मय जाप्ता विभिन्न स्थानों पर तैनात रहा। शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं।
कार्यक्रम की जानकारी विनोद जैन द्वारा प्रदान की गई। विश्व आदिवासी दिवस पर पारसोला में आयोजित कार्यक्रम ने पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, लोकनृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और भव्य जुलूस के माध्यम से आदिवासी संस्कृति, परंपरा, शिक्षा, विकास और सामाजिक एकजुटता के संदेश को प्रमुखता से सामने रखा।