खेरवाड़ा से खुणादरी जिनालय तक 22 किमी पैदल यात्रा, तपस्वियों का सम्मान
खेरवाड़ा से खुणादरी स्थित प्राचीन जिनालय तक 22 किलोमीटर की पैदल यात्रा में करीब 300 श्रद्धालु शामिल हुए। भगवान आदिनाथ के दर्शन, अभिषेक और शांतिधारा के बाद 10 एवं 5 उपवास करने वाले तपस्वियों का सम्मान किया गया।
तस्वीर में खेरवाड़ा से खुणादरी पदयात्रा एवं सम्मान समारोह के दौरान अतिथिगण एक तपस्वी को अभिनंदन पत्र और नारियल भेंट करते हुए नजर आ रहे हैं।
खेरवाड़ा में श्री नेमीनाथ नवयुवक मंडल के तत्वावधान में खेरवाड़ा से खुणादरी स्थित प्राचीन जिनालय तक 22 किलोमीटर की भव्य पैदल यात्रा निकाली गई। यात्रा में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सहित करीब 300 धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
खुणादरी के प्राचीन जिनालय में देवाधिदेव श्री 1008 आदिनाथ भगवान की करीब 500 वर्ष प्राचीन अष्टधातु प्रतिमा विराजमान है। पैदल यात्रा के बाद श्रद्धालुओं ने जिनालय पहुंचकर भगवान आदिनाथ के दर्शन किए तथा अभिषेक एवं शांतिधारा का पुण्यार्जन किया।
इस अवसर पर फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के अंतरराष्ट्रीय संगठन के पदाधिकारियों और स्थानीय सदस्यों की ओर से दशलक्षण धर्म के दौरान 10 एवं 5 उपवास की कठिन तपस्या करने वाले तपस्वियों का अनुमोदन एवं सम्मान किया गया। तपस्वियों को फोटो फ्रेमयुक्त अनुमोदना पत्र भेंट कर उनकी तपस्या के प्रति समाज की श्रद्धा व्यक्त की गई।
कार्यक्रम में फेडरेशन के परम संरक्षक एवं निवर्तमान राजस्थान प्रोविंस अध्यक्ष प्रवीण शाह, महामंत्री शांतिलाल पंचोली सहित स्थानीय पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे। खड़क क्षेत्रीय महासभा तथा खुणादरी ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने भी तपस्वियों के सम्मान एवं समाजोपयोगी कार्यों की सराहना करते हुए शुभकामनाएं दीं।
धर्म, तप, त्याग और सामाजिक एकता से जुड़े इस आयोजन में श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। तपस्वियों का सम्मान समाज में तप, त्याग एवं आत्मसंयम की साधना के प्रति श्रद्धा और अनुमोदना का प्रतीक बना।