जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ उदयपुर में बाल अधिकार अनुसंधान पर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद शोधार्थी कामिनी गुर्जर।

उदयपुर की कामिनी गुर्जर ने बाल अधिकारों के प्रति महाविद्यालयों के विद्यार्थियों की जागरूकता और भारत-विदेश में बाल अधिकारों के संरक्षण से जुड़े मॉडलों के तुलनात्मक अध्ययन पर शोध पूरा कर पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय), उदयपुर के सामाजिक विज्ञान संकाय की शोधार्थी कामिनी गुर्जर को यह उपाधि प्रदान की गई।

16 अक्टूबर को सामने आई इस शैक्षणिक उपलब्धि के तहत कामिनी गुर्जर ने “बाल अधिकार अधिनियम के संदर्भ में महाविद्यालयों के विद्यार्थियों की जागरूकता, अधिनियम के प्रति अपेक्षित एवं वास्तविक भूमिका तथा बाल अधिकारों के भारतीय एवं विदेशी मॉडल का तुलनात्मक अध्ययन” विषय पर शोध कार्य किया। उन्होंने अपना शोध प्रबंध राजनीति विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. एकता हुसैन के निर्देशन में पूर्ण किया।

शोध में महाविद्यालयों के विद्यार्थियों की बाल अधिकार अधिनियम के प्रति जागरूकता का अध्ययन किया गया। इसके साथ ही बाल अधिकारों के संरक्षण में विद्यार्थियों की अपेक्षित एवं वास्तविक भूमिका का विश्लेषण किया गया। शोध के अंतर्गत भारत और विदेशों में प्रचलित बाल अधिकारों के मॉडलों का तुलनात्मक अध्ययन भी शामिल रहा।

कामिनी गुर्जर ने बताया कि यह शोध बाल अधिकारों के प्रति युवाओं में जागरूकता बढ़ाने, उनके संरक्षण में विद्यार्थियों की भूमिका को समझने और बाल अधिकारों से संबंधित व्यवस्थाओं के तुलनात्मक विश्लेषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। शोध के माध्यम से बाल अधिकारों के प्रति विद्यार्थियों की जागरूकता और संरक्षण में उनकी भूमिका को अध्ययन का केंद्र बनाया गया।

कामिनी गुर्जर की इस शैक्षणिक उपलब्धि पर उनके शुभचिंतकों एवं परिचितों ने बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। बाल अधिकार अधिनियम, विद्यार्थियों की जागरूकता और भारतीय एवं विदेशी मॉडलों पर उनके शोध ने उनकी अकादमिक उपलब्धि को बाल अधिकारों के अध्ययन से जुड़े विषय के रूप में सामने रखा है।

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