अरावली संरक्षण पर जनजाति समाज की आवाज, समिति का कार्यकाल 2 माह बढ़ाने की मांग
अरावली संरक्षण को लेकर राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति का कार्यकाल दो माह बढ़ाने की मांग की है। परिषद ने जनजाति समाज से व्यापक परामर्श और क्षेत्रीय दौरों के प्रचार की मांग भी उठाई।
खेरवाड़ा। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और उसके भविष्य की कार्ययोजना को लेकर राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद ने जनजाति समाज की व्यापक भागीदारी और प्रभावी परामर्श सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। परिषद का कहना है कि राजस्थान एवं गुजरात के अरावली क्षेत्र में लाखों जनजाति समुदाय के लोग निवास करते हैं, इसलिए अरावली से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में उनके प्रत्यक्ष सुझाव और सहभागिता जरूरी है।
परिषद के अनुसार माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर अरावली को परिभाषित करने के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति का कार्यकाल 2 अगस्त 2026 को समाप्त हो गया है। समिति के सीमित कार्यकाल में अरावली क्षेत्र के सभी प्रभावित क्षेत्रों और हितधारकों से व्यापक एवं सार्थक परामर्श करना संभव नहीं हो पाया। ऐसे में परिषद ने समिति का कार्यकाल कम से कम दो माह बढ़ाने की मांग की है, ताकि क्षेत्र में व्यापक स्तर पर जाकर लोगों से सुझाव लिए जा सकें।
राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद का कहना है कि अरावली क्षेत्र में रहने वाला जनजाति समाज सदियों से यहां की प्राकृतिक संपदा और पर्यावरण के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है। इसलिए अरावली से संबंधित किसी भी नीतिगत निर्णय से पहले जनजाति समाज के प्रतिनिधियों से व्यापक स्तर पर परामर्श किया जाना चाहिए।
परिषद ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से भी आवश्यक परामर्श किए जाने की मांग की है। परिषद के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 338ए के तहत जनजातियों से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों पर आयोग से परामर्श किया जाना आवश्यक है।
परिषद ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा अरावली क्षेत्र में किए जाने वाले क्षेत्रीय दौरों की जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार करने की भी मांग की है, ताकि अधिक से अधिक प्रभावित व्यक्ति और संस्थाएं अपने सुझाव दे सकें। परिषद के अनुसार प्रचार सामग्री हिंदी एवं गुजराती दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
सुझाव देने की प्रक्रिया को भी सरल बनाने की मांग की गई है। परिषद ने कहा है कि हिंदी, गुजराती एवं अंग्रेजी में सुझाव स्वीकार किए जाएं। केवल वेबसाइट तक सुझाव देने की प्रक्रिया सीमित न रखते हुए डाक के माध्यम से लिखित सुझाव भेजने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि कम पढ़े-लिखे और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी आसानी से अपनी बात समिति तक पहुंचा सकें।
राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद की प्रदेश स्तर पर आयोजित विषय विशेषज्ञों की बैठक में अरावली संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा की गई। चर्चा के बाद इन मांगों को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया। परिषद के प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र प्रकाश पंचोली ने बताया कि अरावली केवल एक पर्वतमाला नहीं, बल्कि जनजाति क्षेत्र की जीवनरेखा है। इसके संरक्षण में जनजाति समाज की सहभागिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
परिषद ने केंद्र एवं राज्य स्तर पर संबंधित जिम्मेदार संस्थाओं से मांग की है कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति को पर्याप्त समय दिया जाए। साथ ही अरावली क्षेत्र के निवासियों, जनजाति प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों से व्यापक एवं सार्थक परामर्श के बाद ही आगे की कार्ययोजना तैयार की जाए। अरावली संरक्षण से जुड़े निर्णयों में स्थानीय समुदाय की भागीदारी और प्रभावी परामर्श को लेकर परिषद की यह मांग अब महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में सामने आई है।