योग गुरु बाबा रामदेव पर लिखी विवादित पुस्तक के मामले में पटना हाई कोर्ट ने प्रकाशन गृह के खिलाफ जारी समन आदेश को रद्द कर दिया।

बिहार में योग गुरु बाबा रामदेव पर लिखी गई एक किताब को लेकर चल रहे विवाद में पटना उच्च न्यायालय ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने एक प्रमुख प्रकाशन गृह के खिलाफ जारी किए गए आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने वैशाली जिले के हाजीपुर स्थित मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) द्वारा अक्टूबर 2017 में दिए गए दो आदेशों को खारिज कर दिया है।

क्या था पूरा किताब विवाद?

हाजीपुर के रहने वाले अमित कुमार ने बाबा रामदेव के समर्थक के रूप में एक शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत थी कि 'गॉडमैन टू टाइकून: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ स्वामी रामदेव' नामक पुस्तक में कुछ ऐसे हिस्से हैं, जिनसे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और उनके गुरु की मानहानि हुई है। इस शिकायत के आधार पर निचली अदालत ने प्रमुख प्रकाशन गृह 'जगरनॉट बुक्स प्राइवेट लिमिटेड' को समन जारी किया था।

हाई कोर्ट ने क्यों रद्द किया आदेश?

निचले कोर्ट के इस कदम के खिलाफ प्रकाशन गृह ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 482 के तहत उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। इस धारा के तहत उच्च न्यायालय के पास अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करने का अधिकार होता है। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ इस तरह की अभियोजन कार्रवाई में बुनियादी कानूनी खामियां मौजूद हैं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में कानूनी रूप से निर्धारित अनिवार्य शर्तें पूरी नहीं हो रही हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में आपराधिक कार्रवाई को आगे जारी रखना सही नहीं होगा।