हरियाणा स्थापना दिवस पर जानिए 60 वर्षों की शानदार विकास गाथा, कैसे 17वां राज्य बना भारत का पावरहाउस?
1 नवंबर 1966 को पंजाब से अलग होकर बना हरियाणा राज्य आज अपने 60 साल पूरे कर चुका है, जानिए इसके गठन और विकास की पूरी कहानी।
हरियाणा के 60वें स्थापना दिवस पर राज्य की सांस्कृतिक झलक, ऐतिहासिक धरोहर और आधुनिक विकास को दर्शाती विशेष तस्वीर.
1 नवंबर 1966 को पंजाब से अलग होकर एक नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया हरियाणा आज अपना 60वां स्थापना दिवस मना रहा है। छह दशक पहले जब यह प्रदेश बना था, तब इसकी पहचान मुख्य रूप से रेतीले इलाकों और कीकर के जंगलों तक सीमित थी और यहाँ बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव था। हालांकि, प्राचीन ग्रंथों जैसे कि महाभारत, मनुस्मृति और पुराणों में इस भूभाग का गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की इसी पवित्र धरती पर अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। समय के साथ संघर्षों और विकास के रास्तों को तय करते हुए आज हरियाणा देश के सबसे समृद्ध और विकसित राज्यों में गिना जाता है।
हरियाणा गठन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संघर्ष
हरियाणा के गठन की मांग देश की आजादी से पहले ही शुरू हो गई थी, हालांकि उस समय सबसे बड़ा मुद्दा संयुक्त पंजाब का था। 1930 के दशक में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के पक्ष में थे, लेकिन देश विभाजन के बाद अलगाववादी खतरों को देखते हुए इस पर रोक लगा दी गई।
- प्रमुख नेता: अलग हरियाणा की मांग को लेकर चौधरी देवी लाल और प्रोफेसर शेर सिंह ने आंदोलन का नेतृत्व किया। दूसरी ओर, शुरुआत में राव बीरेंद्र सिंह और भगवत दयाल शर्मा जैसे नेता इसके विरोध में थे, जो बाद में राज्य के मुख्यमंत्री भी बने।
- जेवीपी कमेटी और फजल अली आयोग: आजादी के बाद गठित जेवीपी कमेटी और वर्ष 1953 में बने राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली आयोग) ने शुरुआत में प्रशासनिक और आर्थिक कारणों का हवाला देते हुए अलग हरियाणा की मांग को खारिज कर दिया था। आयोग का मानना था कि नए राज्य के पास विकास के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होंगे।
- सच्चर फॉर्मूला और विरोध: आंदोलन को शांत करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री भीमसेन सच्चर ने एक फार्मूला पेश किया, जिसमें हिंदी और पंजाबी भाषी क्षेत्र बांटे गए, लेकिन जनता ने इसे अस्वीकार कर दिया। राजस्व मंत्री प्रताप सिंह कैरों के कुछ फैसलों और विधानसभा में चौधरी देवी लाल द्वारा हरियाणवी भाषा में अपनी बात रखने से आंदोलन और तेज हो गया।
- आधिकारिक गठन: अंततः 1965 में संत फतेह सिंह के अनशन और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पंजाब के विभाजन को मंजूरी दी। 23 अप्रैल 1966 को जेसी शाह की अध्यक्षता में सीमा आयोग बना और आखिरकार 1 नवंबर 1966 को हरियाणा देश का 17वां राज्य बन गया।
आर्थिक तरक्की और कृषि से आधुनिक उद्योगों तक का सफर
स्थापना के समय कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था और सीमित औद्योगिक आधार वाले हरियाणा ने पिछले 60 वर्षों में अपनी आर्थिक संरचना में अभूतपूर्व बदलाव किए हैं।
- कृषि और पशुपालन: राज्य का सकल बोया गया क्षेत्र 1966-67 के लगभग 45.99 लाख हेक्टेयर से बढ़कर वर्ष 2024-25 में करीब 66.83 लाख हेक्टेयर हो गया। खाद्यान्न उत्पादन लगभग नौ गुना बढ़कर 225.47 लाख टन तक पहुंच गया। इसके अलावा, डेयरी और पशुपालन ने किसानों को अतिरिक्त आय दी है, जहाँ दूध उत्पादन 2024-25 में 125.93 लाख टन दर्ज किया गया।
- औद्योगिक विकास: दिल्ली से सटा होने के कारण मानेसर और बावल में ऑटोमोबाइल उद्योग, फरीदाबाद में इंजीनियरिंग, पानीपत में कपड़ा और पेट्रोकेमिकल उद्योग तथा यमुनानगर में प्लाईवुड व कागज उद्योगों का मजबूत जाल बिछ चुका है।
- सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP): वित्त वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमानों के अनुसार, हरियाणा का GSDP मौजूदा कीमतों पर लगभग 13.68 लाख करोड़ रुपये और प्रति व्यक्ति आय लगभग 3,95,618 रुपये आंकी गई है। अर्थव्यवस्था में अब सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 51.2 प्रतिशत हो गई है।
शिक्षा, खेल और सामाजिक योगदान में अग्रणी भूमिका
हरियाणा ने शिक्षा, सुरक्षा और खेल के क्षेत्र में अपनी एक अलग और मजबूत मिसाल पेश की है।
- साक्षरता और जनसांख्यिकी: 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल साक्षरता दर 75.55 प्रतिशत (पुरुष 84.06% और महिला 65.94%) थी। 2011 में राज्य की कुल आबादी करीब 2.53 करोड़ थी।
- मेडल की खान: खेल की दुनिया में हरियाणा को देश का पावरहाउस माना जाता है। ओलंपिक खेलों में देश के कुल पदकों में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले हरियाणा के खिलाड़ियों की रहती है। योगेश्वर दत्त, साक्षी मलिक, बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट, और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा जैसे महान खिलाड़ियों ने देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है।
- सेना में योगदान: भारतीय सेना में हर 10वां सैनिक हरियाणा से ताल्लुक रखता है, जो राज्य की देशभक्ति और सैन्य परंपरा को दर्शाता है। इसके अलावा, अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का जन्म भी करनाल, हरियाणा में ही हुआ था।
ऐतिहासिक धरोहर और वर्तमान राजनीतिक स्वरूप
हरियाणा का इतिहास ऐतिहासिक लड़ाइयों का गवाह रहा है। पानीपत की तीनों प्रसिद्ध लड़ाइयां (1526, 1556 और 1761) इसी धरती पर लड़ी गईं, जिन्होंने भारतीय इतिहास की दिशा तय की थी।
वर्तमान प्रशासनिक स्वरूप की बात करें तो आज हरियाणा में कुल 23 जिले, 90 विधानसभा सीटें, 10 लोकसभा और 5 राज्यसभा सीटें हैं। हालिया राजनीतिक परिदृश्य में राज्य में बीजेपी ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाई है।
भविष्य की चुनौतियाँ और राह
अपनी छह दशकों की यात्रा में हरियाणा ने आर्थिक समृद्धि और आधुनिकता की ओर लंबी छलांग लगाई है, लेकिन इसके साथ ही राज्य के सामने कुछ गंभीर चुनौतियाँ भी मौजूद हैं। घटता लिंगानुपात (2011 में 879 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष), भूजल स्तर में गिरावट, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता, तथा किसानों की आय में स्थिरता सुनिश्चित करना आगामी समय में राज्य की सफलता के मुख्य पैमाने होंगे।