बाएं तरफ प्रसाद तैयार करते लोग और दाएं तरफ नीली शर्ट पहने अधिकारी आईएएस तुकाराम मुंढे गणेशोत्सव पर साफ-सफाई के निरीक्षण के संदर्भ में दिखाई दे रहे हैं।

महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की शुरुआत के साथ ही त्योहार की रौनक चारों तरफ फैल चुकी है。 इस पावन अवसर पर शहर-शहर में बप्पा के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है और विभिन्न गणेश मंडलों की तरफ से महाप्रसाद का वितरण भी किया जा रहा है。 श्रद्धालुओं की आस्था और सेहत को ध्यान में रखते हुए, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी एफडीए (FDA) पूरी तरह मुस्तैद हो गया है。 आईएएस तुकाराम मुंढे की अगुवाई में एफडीए ने गणेशोत्सव के सभी मंडलों के लिए साफ-सफाई और सुरक्षा के कड़े निर्देश जारी किए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी अनहोनी से बचा जा सके。

त्योहार के इन दिनों में लोग बड़े पैमाने पर महाप्रसाद, तरह-तरह की मिठाइयां जैसे पेड़े और बर्फी के साथ-साथ खोया, दूध और अन्य डेयरी उत्पादों का सेवन करते हैं。 ऐसे में खाने-पीने की इन चीजों को रखने, संभालने या बांटने में अगर थोड़ी सी भी लापरवाही बरती जाए, तो फूड पॉइजनिंग का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इसे गंभीरता से लेते हुए एफडीए ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खाना बनाने से लेकर उसे भक्तों में बांटने तक हर एक चरण पर साफ-सफाई और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए。 हालांकि मंडलों को महाप्रसाद तैयार करने के लिए अलग से किसी विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्हें शुद्धता और गुणवत्ता के नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य किया गया है。

प्रशासन की तरफ से मंडलों के लिए कई जरूरी गाइडलाइंस भी साझा की गई हैं। इसके तहत महाप्रसाद के लिए कच्चा सामान केवल रजिस्टर्ड फूड बिजनेस ऑपरेटरों से ही खरीदने को कहा गया है, और खाना बनाने की जगह पूरी तरह साफ-सुथरी व हाइजीनिक होनी चाहिए। प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले बर्तन साफ और ढके हुए होने चाहिए, तथा किसी भी सड़े या खराब फल का इस्तेमाल न करने की हिदायत दी गई है। प्रसाद उतनी ही मात्रा में तैयार किया जाना चाहिए जितनी जरूरत हो, और यह सुनिश्चित किया जाना बेहद जरूरी है कि उसमें इस्तेमाल होने वाला पानी पूरी तरह पीने योग्य और सुरक्षित हो।

इसके अलावा सेवा देने वाले वालंटियर्स के लिए भी एप्रन, ग्लव्स और कैप जैसे सुरक्षात्मक गियर पहनना अनिवार्य किया गया है। प्रसाद बनाने वाले व्यक्ति को त्वचा या किसी भी प्रकार की संक्रामक बीमारी नहीं होनी चाहिए, और मावा-खोया जैसी चीजों को इस्तेमाल करते वक्त विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। दूध और डेयरी उत्पादों को चार डिग्री सेल्सियस या उससे कम तापमान पर सुरक्षित रखने के निर्देश हैं, और जांच के लिए आने वाले एफडीए अधिकारियों का पूरा सहयोग करने को कहा गया है। एफडीए के ज्वाइंट कमिश्नर कृष्णा जयपुरकर ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि खाने की क्वालिटी को लेकर कोई शिकायत हो, तो वे टोल-फ्री नंबर 1800222365 या आधिकारिक वेबसाइट पर संपर्क कर सकते हैं। अधिकारियों की इस सख्त निगरानी का मुख्य उद्देश्य यही है कि बप्पा के इस पावन उत्सव में हर भक्त तक सुरक्षित, स्वच्छ और उत्तम गुणवत्ता वाला प्रसाद पहुंचे।