क्या अब देशवासियों को मिलेगा 25,530 करोड़ रुपयोंका खर्च? SARTHAK-PDS योजना को मिली मंजूरी
केंद्रीय कैबिनेट ने राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और रिसाव रोकने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों से लैस एकीकृत अम्ब्रेला योजना को दी मंजूरी।
विभिन्न विशेषताओं की सूची और राशन वितरण के चित्रों वाला इन्फोग्राफिक पोस्टर सार्थक-पीडीएस योजना के संदर्भ में दिख रहा है।
Sarthak PDS scheme approval : भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के इतिहास में एक ऐसा ऐतिहासिक और युगांतरकारी अध्याय जुड़ने जा रहा है, जो देश के करोड़ों गरीब परिवारों के चूल्हे को न सिर्फ सुरक्षित रखेगा बल्कि राशन वितरण के पूरे तंत्र को पूरी तरह पारदर्शी बना देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की उच्च स्तरीय बैठक में एक बेहद संवेदनशील और दूरगामी फैसला लेते हुए “राशन परिवहन और हैंडलिंग सहायता-पीडीएस में स्वचालन के साथ आय योजना” यानी 'सार्थक-पीडीएस' (SARTHAK-PDS) को एक वृहद अम्ब्रेला योजना के रूप में जारी रखने की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। देश के अंतिम छोर पर खड़े नागरिक तक बिना किसी रिसाव और बिना किसी धांधली के राशन पहुंचाने की इस महा-योजना के लिए केंद्र सरकार ने अपने खजाने का मुंह खोल दिया है। इस एकीकृत डिजिटल और प्रशासनिक ढांचे को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सरकार की ओर से 25,530 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजटीय प्रावधान किया गया है, जो सीधे तौर पर देश की खाद्य सुरक्षा और गरीब कल्याण की दिशा में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।
इस ऐतिहासिक निर्णय की तकनीकी और प्रशासनिक गहराई को देखें तो यह योजना महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि देश के राशन वितरण ढांचे का एक मुकम्मल कायाकल्प है। 16वें वित्त आयोग के चक्र की अवधि के दौरान लागू होने वाली इस योजना के तहत केंद्रीय कैबिनेट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलने वाली वित्तीय सहायता के मानदंडों में भी व्यापक संशोधन किया है। इसके अंतर्गत राज्यों के भीतर खाद्यान्नों की सुरक्षित आवाजाही, उनकी हैंडलिंग और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी यानी उचित मूल्य दुकान (FPS) डीलरों के मार्जिन पर होने वाले खर्च के लिए वर्तमान वित्तीय सहायता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाकर जारी रखने का निर्णय लिया गया है। यह नई अम्ब्रेला योजना वास्तव में वर्तमान में चल रही दो बड़ी योजनाओं के एकीकरण का परिणाम है, जिसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत राज्य एजेंसियों को खाद्यान्न परिवहन हेतु मिलने वाली सहायता और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में प्रौद्योगिकी के माध्यम से आधुनिकीकरण लाने वाली 'स्मार्ट-पीडीएस' (SMART-PDS) योजना को आपस में समाहित कर दिया गया है। यह पूरी तरह से एकीकृत और तकनीकी रूप से उन्नत योजना 31 मार्च 2031 तक पूरे देश में अनवरत रूप से संचालित की जाएगी।
'सार्थक-पीडीएस' का मूल विधिक और सामाजिक उद्देश्य एक ऐसा नागरिक-केंद्रित, एकीकृत, बुद्धिमान और इंटरऑपरेबल (आपस में संवाद करने में सक्षम) सार्वजनिक वितरण प्रणाली ढांचा तैयार करना है, जिससे सरकारी अनाज की कालाबाजारी और रिसाव को पूरी तरह से खत्म किया जा सके। इस व्यवस्था को अचूक बनाने के लिए सरकार पहली बार देश की राशन प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग (ML), नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) और अत्याधुनिक ब्लॉकचेन जैसी चौथी औद्योगिक क्रांति की तकनीकों का समावेश करने जा रही है। इन उन्नत तकनीकों के माध्यम से पूरे देश में अनाज की आवाजाही की वास्तविक समय (रियल टाइम) में कड़ी निगरानी की जा सकेगी। इसके अलावा, उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए एआई-आधारित एक त्वरित शिकायत निवारण और डेटा विश्लेषण प्रणाली विकसित की जाएगी। राज्यों में डेटा-आधारित सख्त निगरानी रखने के लिए विशेष 'राज्य कमान कंट्रोल सेंटर' स्थापित किए जाएंगे और पूरी प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए आईएसओ (ISO) प्रमाणित प्रक्रिया ढांचा तैयार किया जाएगा, ताकि देश के हर राशन कोटे में पारदर्शिता, सुरक्षा और स्थिरता की गारंटी दी जा सके।
संवैधानिक और कानूनी प्रतिबद्धताओं के धरातल पर यह योजना भारत सरकार द्वारा अपने नागरिकों को एक सम्मानजनक और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित कराने की दिशा में उठाया गया एक विधिक कदम है। भारत सरकार ने देश के नागरिकों को पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण पौष्टिक खाद्यान्न उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने का जो संकल्प लिया था, यह योजना उसी को अमलीजामा पहनाती है। 'सार्थक-पीडीएस' का यह सुरक्षा कवच राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आने वाले देश के 81.35 करोड़ लाभार्थियों के अधिकारों की रक्षा करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि सरकार द्वारा आवंटित अनाज का एक-एक दाना सीधे हकदार नागरिक की थाली तक पहुंचे।
यह महा-योजना पिछले एक दशक के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली के डिजिटलीकरण के लिए किए गए निरंतर प्रयासों की एक तार्किक परिणति है। सरकार ने इससे पहले टार्गेटेड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (TPDS) के एंड-टू-एंड कंप्यूटरीकरण से लेकर, 'इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट ऑफ पीडीएस' (IM-PDS) और 'मेरा राशन', 'अन्न मित्र', 'राइटफुल टारगेटिंग डैशबोर्ड' तथा 'अन्न सहायता' जैसे कई नागरिक-केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सफलतापूर्वक जमीन पर उतारा है। अब 'सार्थक-पीडीएस' के रूप में आया यह नया तकनीकी और प्रशासनिक ढांचा न केवल देश की खाद्य वितरण व्यवस्था को आधुनिक युग के अनुरूप सुरक्षित बनाएगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भूख और कुपोषण के खिलाफ भारत की लड़ाई को एक बेहद मजबूत, आत्मनिर्भर और डिजिटल रूप से सुरक्षित आधार प्रदान करेगा।