कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया दे रहे हैं इस्तीफा! जानें कौन बनेगा अगला CM ?
कांग्रेस विधायक दल में बदलाव की तैयारी के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात कर पद छोड़ने की संभावना है।
कर्नाटक में आसन्न नेतृत्व परिवर्तन और नए मुख्यमंत्री के चुनाव की राजनीतिक सरगर्मी को दर्शाता हुआ एक परिचयात्मक डिजिटल इन्फोग्राफिक ग्राफिक्स।
Karnataka next Chief Minister : कर्नाटक की सियासत में इस समय एक ऐसा अभूतपूर्व और बड़ा सियासी भूचाल आ चुका है, जिसने दक्षिण भारत के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। राज्य में अगले दो दिनों के भीतर सत्ता परिवर्तन की अटकलें अब पूरी तरह हकीकत में बदलती नजर आ रही हैं, क्योंकि खुद कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री आर. वी. देशपांडे ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अगले 24 घंटे के भीतर अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। किसी वरिष्ठ कांग्रेस नेता द्वारा सार्वजनिक रूप से दिया गया यह ऐसा पहला बयान है, जिसने यह साबित कर दिया है कि पर्दे के पीछे कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के राजतिलक की स्क्रिप्ट पूरी तरह से लिखी जा चुकी है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पार्टी आलाकमान को दी गई अपनी जुबान का मान रखने के लिए कुर्सी छोड़ने का मन बना लिया है, जिसके बाद अब उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार का कर्नाटक का अगला कप्तान बनना लगभग तय माना जा रहा है।
इस बड़े तख्तापलट की पटकथा तब और साफ हो गई जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अचानक राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलने के लिए 28 मई का समय मांग लिया। कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात के दौरान सिद्धारमैया राज्यपाल गहलोत को अपना औपचारिक इस्तीफा सौंप सकते हैं। इस फैसले से ठीक पहले दिल्ली के सियासी गलियारों में कांग्रेस आलाकमान राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सिद्धारमैया और शिवकुमार के साथ कई दौर की मैराथन बैठकें की थीं। दोनों नेताओं से अलग-अलग और संयुक्त रूप से घंटों तक की गई इस चर्चा के बाद ही सत्ता के इस शांतिपूर्ण हस्तांतरण पर अंतिम सहमति बन सकी है। हालांकि, विधायक दल अभी भी चाहता था कि सिद्धारमैया अपने पद पर बने रहें, लेकिन मुख्यमंत्री ने आलाकमान को दिए गए अपने वादे का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को विनम्रतापूर्वक ठुकरा दिया।
इस बड़े घटनाक्रम के बीच बंगलुरु में बैठकों और चर्चाओं का दौर बेहद तेज हो चुका है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात करने के बाद कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री एच. के. पाटिल ने मीडिया से बात करते हुए अपनी गहरी चिंताएं जाहिर कीं, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री इस पूरे विषय पर फिलहाल मौन साधे हुए हैं। दूसरी तरफ, राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री सतीश जारकीहोली ने एक महत्वपूर्ण संकेत देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित नाश्ते की बैठक के बाद राज्य की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। वहीं, कांग्रेस आलाकमान के बेहद करीबी माने जाने वाले सांसद सैयद नसीर हुसैन ने दिल्ली में हुई बैठकों का विवरण देते हुए बताया कि पार्टी केवल मुख्यमंत्री का चेहरा ही नहीं बदल रही, बल्कि आने वाले दिनों में होने वाले राज्यसभा चुनाव, विधान परिषद चुनाव और राज्य मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल को लेकर भी फैसले लिए जा रहे हैं। कांग्रेस को इस नए बदलाव में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, जिला संतुलन, जाति और विभिन्न समुदायों के समीकरणों को बेहद बारीकी से साधना होगा, जिसकी पूरी तैयारी कर ली गई है।
संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के लिहाज से यह इस्तीफा बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर होने जा रहा है। जैसे ही सिद्धारमैया राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे, वैसे ही तकनीकी रूप से मौजूदा मंत्रिमंडल भंग हो जाएगा और उसके तुरंत बाद कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाकर डी. के. शिवकुमार को नया नेता चुना जाएगा। इसके बाद राज्यपाल नए मुख्यमंत्री को सरकार बनाने और शपथ ग्रहण करने का न्योता देंगे। कांग्रेस के लिए यह बदलाव इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि आगामी परिषद चुनावों के लिए पांच लोगों को राज्यपाल के माध्यम से नामांकित किया जाना है, जिसे लेकर कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श चल रहा है।
कर्नाटक के इस ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन का असर सिर्फ इस सूबे तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की राजनीतिक साख और संगठन की ताकत पर पड़ेगा। सिद्धारमैया जैसे कद्दावर और जनाधार वाले नेता का स्वेच्छा से पद छोड़ना और डी. के. शिवकुमार जैसे संकटमोचक नेता का कमान संभालना यह दर्शाता है कि कांग्रेस आलाकमान अब राज्यों में आंतरिक कलह को पूरी तरह समाप्त कर एक मजबूत संदेश देने की कोशिश कर रहा है। आने वाले कुछ ही घंटों में राजभवन से निकलने वाली हर एक खबर और नई कैबिनेट का ढांचा यह तय करेगा कि दक्षिण भारत के इस सबसे महत्वपूर्ण राज्य में कांग्रेस का यह नया प्रयोग कितना सफल और दूरगामी साबित होता है।