राम मंदिर के सोना-चांदी दान पर बड़ा खुलासा: SIT ने दी क्लीन चिट, गायब होने के आरोप निकले बेबुनियाद

अयोध्या के राम मंदिर में दान में मिली वस्तुएं सुरक्षित, ट्रस्ट ने जारी किया 2926 कीमती उपहारों का पूरा लेखा-जोखा।

Update: 2026-07-08 07:30 GMT

अयोध्या के राम मंदिर में दान में मिली कीमती रजत वस्तुएं और सोने की परत वाली रामचरितमानस को प्रदर्शित करते हुए।

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान के रूप में प्राप्त स्वर्ण और रजत वस्तुओं की सुरक्षा और उनके हिसाब-किताब को लेकर उठ रहे सवालों पर विराम लग गया है। मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि मंदिर में दान में मिली कीमती वस्तुएं गायब नहीं हुई हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राहत की सांस ली है, क्योंकि इसने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें दान की गई सामग्री के चोरी होने या किसी बड़े संगठित अपराध की बात कही गई थी। एसआईटी की जांच में यह निष्कर्ष निकला है कि जो भी विसंगतियां सामने आईं, वे किसी बड़ी साजिश का परिणाम नहीं, बल्कि दान गणना केंद्र पर तैनात कुछ कर्मचारियों की कार्यशैली में लापरवाही और प्रशासनिक खामियों का नतीजा थीं।

ट्रस्ट ने दान में मिली बहुमूल्य वस्तुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पहले ही एक व्यवस्थित प्रक्रिया अपना रखी है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने मीडिया के समक्ष मंदिर में प्राप्त कुछ विशेष उपहारों को प्रदर्शित किया, जिनमें सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस भी शामिल है। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस लक्ष्मीनारायण द्वारा दान की गई इस रामचरितमानस की कीमत लगभग पांच करोड़ रुपये आंकी गई थी, जिसे लेकर पहले यह दावा किया गया था कि यह गायब हो गई है। इसी प्रकार की अन्य वस्तुओं, जैसे कि चांदी की कागभुशुंडी मूर्ति के संबंध में भी लगाए गए आरोप जांच में निराधार पाए गए हैं। ट्रस्ट के पास अब तक प्राप्त हुई कुल 2926 कीमती वस्तुओं का पूरा लेखा-जोखा मौजूद है और श्रद्धालु स्वयं अयोध्या में ट्रस्ट के कार्यालय में जाकर इनके रिकॉर्ड का सत्यापन कर सकते हैं।

वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट ने बड़ी मात्रा में प्राप्त चांदी की वस्तुओं और आभूषणों को सुरक्षित रखने के लिए एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया है। मंदिर को अब तक 32.2 किलोग्राम सोना और करीब 1195 किलोग्राम चांदी दान में मिली है। इन कीमती धातुओं को सुरक्षित भंडारण के लिए सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की तकनीकी सहायता से पिघलाकर सिल्लियों में परिवर्तित किया गया है। अब तक लगभग 944 किलोग्राम चांदी को रीसाइकल कर सिल्लियों का रूप दिया जा चुका है, ताकि उन्हें सुरक्षित लॉकर में रखा जा सके। दान मामले में जांच रिपोर्ट के बाद ट्रस्ट ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करते हुए पारदर्शिता पर जोर दिया है। ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने लाखों राम भक्तों के विश्वास को बनाए रखना अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मंदिर प्रशासन अपने प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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