CUSB में टेक्नोलॉजी विजन 2035 पर मंथन, TIFAC के रोडमैप पर हुई चर्चा
सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार में AI, रोबोटिक्स और 12 प्रमुख क्षेत्रों के लिए तकनीकी रोडमैप और भविष्य की चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
तस्वीर में टेक्नोलॉजी विजन 2035 का TIFAC पोस्टर और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतीक चिह्न दिख रहे हैं।
केंद्रीय विश्वविद्यालय दक्षिण बिहार (CUSB) में टेक्नोलॉजी विजन 2035 को लेकर भविष्य की तकनीकों और उनकी संभावनाओं पर मंथन किया गया। कार्यक्रम में टेक्नोलॉजी विजन 2035 के तहत देश की तकनीकी जरूरतों, भविष्य की तकनीकी दिशा और विभिन्न क्षेत्रों में इसके उपयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
टेक्नोलॉजी विजन 2035 का उद्देश्य वर्ष 2035 तक भारत के नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने में तकनीक की भूमिका को सामने रखना है। इसके तहत शिक्षा, चिकित्सा विज्ञान एवं स्वास्थ्य सेवा, खाद्य एवं कृषि, जल, ऊर्जा, पर्यावरण, आवास, परिवहन, बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, सामग्री तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी जैसे 12 प्रमुख क्षेत्रों के लिए तकनीकी रोडमैप तैयार किए गए हैं।
टेक्नोलॉजी विजन 2035 में भविष्य की तकनीकों को चार स्तरों में देखा गया है—तैनाती के लिए तैयार तकनीक, प्रयोगशाला से क्षेत्र तक पहुंचने वाली तकनीक, लक्षित अनुसंधान की आवश्यकता वाली तकनीक और कल्पना के स्तर पर मौजूद तकनीक। विजन दस्तावेज में भविष्य की चुनौतियों का व्यापक प्रभाव के साथ सामना करने के लिए 10 प्रमुख राष्ट्रीय तकनीकी चुनौतियों की भी पहचान की गई है।
चर्चा के दौरान साइबर-फिजिकल सिस्टम, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, बिग डेटा एनालिसिस, डीप लर्निंग, क्वांटम कम्युनिकेशन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी उभरती तकनीकों के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। इन तकनीकों के उपयोग की संभावनाएं सेवाओं और विनिर्माण के साथ कृषि, जल, ऊर्जा, यातायात प्रबंधन, स्वास्थ्य, पर्यावरण, बुनियादी ढांचे और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बताई गई हैं।
टेक्नोलॉजी विजन 2035 को Technology Information, Forecasting and Assessment Council (TIFAC) ने तैयार किया था। यह विजन 2016 में 103वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस के दौरान सामने आया था। इसका केंद्रीय उद्देश्य तकनीक के माध्यम से भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, समृद्धि बढ़ाना और पहचान को मजबूत करना है।
सीयूएसबी में हुई चर्चा ने वर्ष 2035 की तकनीकी जरूरतों और भविष्य की तकनीकों को लेकर उच्च शिक्षा, अनुसंधान तथा नवाचार के स्तर पर विचार-विमर्श का अवसर उपलब्ध कराया।