नागोया में भारत का ऐतिहासिक 'क्लीन स्वीप'- एक ही इवेंट में भारत के वीरों ने जीते गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज, शान से लहराया तिरंगा|
पुरुषों के एफ46 शॉटपुट इवेंट में सचिन खिलारी ने स्वर्ण, मोहम्मद यासिर ने रजत और परवीन ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा।
नागोया एशियन पैरा गेम्स में भारत के लिए (बाएं से दाएं) सचिन सरजेराव खिलारी, मोहम्मद यासिर और परवीन जिन्होंने पुरुषों के एफ46 शॉटपुट इवेंट में तीनों पदक जीते।
जापान के नागोया में आयोजित हो रहे एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने एक बार फिर पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन कर दिया है। पुरुषों की एफ46 शॉटपुट यानी गोला फेंक स्पर्धा में भारत के खिलाड़ियों ने ऐसा कमाल का प्रदर्शन किया कि प्रतियोगिता के तीनों पदक यानी गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों ही भारत की झोली में आ गए। इस शानदार क्लीन स्वीप से पूरे देश में खुशी की लहर है और हमारा तिरंगा शान से ऊंचा लहरा रहा है।
इस इवेंट में भारत के स्टार एथलीट सचिन सरजेराव खिलारी ने कमाल कर दिखाया। उन्होंने अपने खेल का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए नया एशियन गेम्स रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। सचिन ने अपने छठे और आखिरी प्रयास में 15.87 मीटर दूर गोला फेंककर पहला स्थान हासिल किया। इसके साथ ही उन्होंने इस स्पर्धा का पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया, जो इससे पहले 15.67 मीटर का था। सचिन की यह उपलब्धि इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि उन्होंने पिछले संस्करण में जीते अपने स्वर्ण पदक का सफलतापूर्वक बचाव करते हुए एक बार फिर साबित कर दिया कि वे खेल के पक्के खिलाड़ी हैं। सचिन इससे पहले पेरिस पैरालंपिक में भी देश के लिए रजत पदक जीत चुके हैं।
इस स्पर्धा में भारत का दबदबा यहीं नहीं रुका। देश के दूसरे खिलाड़ी मोहम्मद यासिर ने भी अपने खेल से सभी को प्रभावित किया। यासिर ने अपने तीसरे प्रयास में 15.06 मीटर का शानदार थ्रो करते हुए सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। उनके ठीक पीछे रहे परवीन ने 14.94 मीटर दूर गोला फेंककर कांस्य पदक अपने नाम किया। इस तरह एक ही इवेंट के पोडियम पर भारत के तीनों खिलाड़ी एक साथ नजर आए और देश के लिए स्वर्ण, रजत और कांस्य तीनों मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। बड़े मुकाबलों और दबाव के बीच हमारे इन खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन यह दिखाता है कि वे अपनी कड़ी मेहनत और लगन से किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं।
गौरतलब है कि पैरा एथलेटिक्स की एफ46 श्रेणी वह वर्ग है जिसमें शरीर के ऊपरी हिस्से यानी एक हाथ की कोहनी के ऊपर या नीचे दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इस कैटेगरी के एथलीट खड़े होकर थ्रो करते हैं और गोला फेंकने के दौरान अपने शरीर के निचले हिस्से और कूल्हों की पूरी ताकत का इस्तेमाल करते हैं। एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों की इस ऐतिहासिक सफलता ने देश के खेल अभियान को एक नई मजबूती दी है। सचिन खिलारी के रिकॉर्ड तोड़ गोल्ड मेडल के साथ-साथ मोहम्मद यासिर और परवीन के इन पदकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर भारतीय पैरा एथलेटिक्स की मजबूत ताकत और प्रतिभा का डंका बजा दिया है।