सवाई माधोपुर में बारिश के दौरान सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में झाड़-फूंक का चलन भी सामने आ रहा है। जागरूकता के अभाव में कई बार सर्पदंश पीड़ित को अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराई जाती है। समय पर उपचार नहीं मिलने से पीड़ित की जान को खतरा बढ़ जाता है।

सीएमएचओ डॉ. अनिल कुमार जेमिनी ने बताया कि जिले में आए दिन सर्पदंश की घटनाएं हो रही हैं। झाड़-फूंक में विश्वास और समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण सर्पदंश पीड़ित दम तोड़ देते हैं। उन्होंने बताया कि सर्पदंश की स्थिति में एंटी स्नेक वेनम लगाए जाने से मौत पर काबू पाया जा सकता है। सर्पदंश के बाद पहला एक घंटा महत्वपूर्ण होता है, इसलिए सर्प के काटने पर पीड़ित को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। जिले के सभी चिकित्सा संस्थानों पर एंटी स्नेक वेनम से उचित उपचार उपलब्ध है।

डॉ. जेमिनी ने बताया कि सर्पों के निवास स्थान यानी बिलों में पानी भर जाने के कारण बरसात के दिनों में सर्प बाहर निकलते हैं। इससे सर्पदंश का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बचाव के लिए ग्रामीणों से रात में मच्छरदानी का उपयोग करने, जमीन पर सोने से बचने तथा झाड़ियों और गंदगी से दूर रहने की अपील की। बिस्तर और कपड़ों को झटककर उपयोग करने तथा खेतों में काम करते समय सावधानी बरतने की भी सलाह दी गई है। रात में घास-फूस में जाने से बचने को भी कहा गया है।

उन्होंने बताया कि सभी सर्प जहरीले नहीं होते हैं। सर्पदंश होने पर संभव हो तो सर्प की पहचान करने का प्रयास किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे उपचार में सहूलियत रहती है। जिला अस्पताल में जहरीले सर्प के काटने का उपचार उपलब्ध है। सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय समय पर उपचार कराना ही पीड़ित की जान बचाने के लिए महत्वपूर्ण है।

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