अनिता जैन ने मोहनखेड़ा तीर्थ में वर्षीतप का पारणा किया

हिंडौन सिटी की अनिता जैन ने 13 माह की कठिन तपस्या के बाद अक्षय तृतीया पर मोहनखेड़ा तीर्थ में इक्षुरस ग्रहण कर व्रत पूर्ण किया।

Update: 2026-04-21 10:18 GMT

मोहनखेड़ा तीर्थ में अक्षय तृतीया के अवसर पर वर्षीतप का पारणा करतीं अनिता जैन (दाएं), साथ में इक्षुरस भेंट करतीं उनकी परिजन।

हिंडौन सिटी। आध्यात्मिक साधना और आत्मबल की मिसाल पेश करते हुए हिंडौन सिटी के मोहन नगर निवासी सतीश जैन (खेड़ी वाले) की धर्मपत्नी, तपस्वी बहन अनिता जैन ने 'वर्षीतप' की कठिन आराधना सानंद संपन्न की है। श्री जैन संघ की गौरव अनिता जैन ने अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर मध्य प्रदेश स्थित प्रसिद्ध मोहन खेड़ा तीर्थ में इक्षुरस ग्रहण कर विधिवत पारणा किया।

जैन अलर्ट ग्रुप ऑफ इण्डिया के अध्यक्ष एडवोकेट भगवान सहाय जैन ने इस अवसर पर धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने 400 दिनों तक बिना आहार ग्रहण किए उग्र तपस्या की थी और उत्तर प्रदेश के हस्तिनापुर तीर्थ में गन्ने के रस (इक्षुरस) से अपना तप खोला था। इसी महान परंपरा का अनुसरण करते हुए अनिता जैन ने लगभग 13 महीनों तक निरंतर एक दिन निराहार उपवास और दूसरे दिन एकासना (दिन में केवल एक बार भोजन) करते हुए इस कठिन तप को पूर्ण किया है।

जैन अलर्ट ग्रुप के डॉ. मनोज जैन ने तपस्वी बहन की सराहना करते हुए कहा कि उनकी धर्म के प्रति अटूट श्रद्धा और प्रबल आत्मबल से ही यह दुष्कर तप संभव हो सका है। "तपः परमं निधानम्" के सिद्धांत पर आधारित उनकी यह साधना कर्मों की निर्जरा करने के साथ-साथ मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करेगी, जो समाज के अन्य लोगों के लिए भी तप के मार्ग पर चलने की एक बड़ी प्रेरणा है।

तपस्वी रत्ना अनिता जैन की इस उपलब्धि पर स्थानीय समाज में हर्ष का माहौल है। जैन अलर्ट ग्रुप के सचिव एडवोकेट विवेक जैन ने जानकारी दी कि तपस्वी बहन के अपने गृह नगर हिंडौन सिटी लौटने पर जैन अलर्ट ग्रुप ऑफ इण्डिया द्वारा उनका भव्य अभिनंदन किया जाएगा। यह आयोजन उनकी कठोर साधना के प्रति सम्मान और समाज में आध्यात्मिक चेतना के संचार के उद्देश्य से किया जा रहा है।

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