भीम में रातड़ी तालाब के पास कचरे का अंबार, दुर्गंध और जहरीले धुएं से ग्रामीण परेशान
भीम नगर पालिका क्षेत्र के करेड़ा रोड पर रातड़ी तालाब के पास खुले में कचरा डालने और जलाने से फैल रही गंदगी और धुएं से ग्रामीण परेशान हैं।
राजसमंद जिले के भीम नगर पालिका क्षेत्र स्थित करेड़ा रोड और रातड़ी तालाब के पास खुले में डाले गए कचरे और उसमें लगाई जाने वाली आग से क्षेत्र में फैल रही गंदगी, दुर्गंध तथा धुएं के कारण स्थानीय ग्रामीणों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
राजसमंद। भीम नगर पालिका क्षेत्र के करेड़ा रोड पर रातड़ी तालाब के पास खुले में कचरा डालने और उसे जलाने की समस्या से स्थानीय ग्रामीण परेशान हैं। लंबे समय से जमा कचरे के कारण क्षेत्र में गंदगी और दुर्गंध फैल रही है। कचरा जलाए जाने से उठने वाला धुआं भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। ग्रामीणों ने नगर पालिका प्रशासन से समस्या का जल्द समाधान कराने की मांग की है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, करेड़ा रोड पर रातड़ी तालाब के पास लंबे समय से शहर का कचरा खुले में डाला जा रहा है। उचित डंपिंग यार्ड और कचरे के निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने से यहां बड़ी मात्रा में कचरा जमा हो गया है। इसके चलते आसपास के क्षेत्र में गंदगी का माहौल बना हुआ है और दुर्गंध के कारण लोगों का रहना मुश्किल हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जमा कचरे को कई बार खुले में जला दिया जाता है। इससे आसपास के इलाके में धुआं फैलता है और लोगों को बदबू के साथ धुएं की समस्या का सामना करना पड़ता है। खुले में पड़े कचरे में प्लास्टिक और अन्य हानिकारक सामग्री होने से गायों सहित दूसरे पशुओं के उसे खाने का खतरा भी बना हुआ है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि इस कचरे को खाने से पशु बीमार हो रहे हैं और उनकी मृत्यु तक हो सकती है।
समस्या से परेशान समस्त ग्रामवासियों ने नगर पालिका भीम के अध्यक्ष को शिकायत सौंपकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने करेड़ा रोड और रातड़ी तालाब के पास जमा कचरे को हटवाने, उसके उचित निस्तारण की व्यवस्था करने तथा खुले में कचरा डालने और जलाने पर रोक लगाने की मांग उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो क्षेत्र में गंदगी और प्रदूषण की स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब नगर पालिका प्रशासन की कार्रवाई पर नजर है कि खुले में कचरा डालने और जलाने की समस्या से स्थानीय लोगों तथा पशुओं को राहत दिलाने के लिए कब तक प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।