तमिलनाडु में 'थलपति' युग का आगाज़: क्या अरविंद केजरीवाल की तर्ज पर सत्ता के केंद्र बनेंगे विजय?

रुझानों में 100 से अधिक सीटों पर बढ़त के साथ विजय बने सत्ता की धुरी; युवाओं ने टीवीके पर जताया भरोसा।

Update: 2026-05-04 07:10 GMT

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के रुझानों में अपनी पार्टी टीवीके (TVK) के शानदार प्रदर्शन के बाद समर्थकों का अभिवादन करते सुपरस्टार विजय।

तमिलनाडु की सियासत में एक बार फिर इतिहास खुद को दोहराता हुआ नजर आ रहा है। राज्य की द्रविड़ राजनीति के दशकों पुराने किलों को ढहाते हुए सुपरस्टार विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कजगम' (TVK) एक बड़ी निर्णायक शक्ति बनकर उभरी है। साल 2026 के विधानसभा चुनाव के रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि तमिलनाडु की जनता ने अपना नया 'थलपति' चुन लिया है। तमिल शब्द 'थलपति' का अर्थ होता है सेनापति या वह जननेता जिसे जनता का अगाध प्रेम प्राप्त हो। रुझानों में टीवीके को 100 से अधिक सीटों पर बढ़त मिलना इस बात की तस्दीक करता है कि विजय केवल एक राजनीतिक विकल्प नहीं, बल्कि सत्ता की मुख्य धुरी बनने की ओर अग्रसर हैं।

234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता होती है। शुरुआती रुझानों और एग्जिट पोल्स के आंकड़ों ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। विजय की इस सफलता की तुलना अक्सर दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की शुरुआती जीत से की जा रही है। जिस प्रकार केजरीवाल ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की लहर पर सवार होकर पारंपरिक दलों को पछाड़ा था, ठीक उसी प्रकार विजय ने तमिलनाडु की जटिल द्रविड़ राजनीति के बीच अपनी जगह बनाई है। उनकी 'सुपरस्टार थलाइवर' वाली छवि और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता ने टीवीके को जादुई आंकड़े के करीब पहुंचा दिया है।

इस चुनावी लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका शहरी और युवा मतदाताओं की रही है। रुझानों से स्पष्ट है कि राज्य के युवाओं ने विजय के विजन और उनकी नई सोच पर भरोसा जताया है। चुनावी जानकारों का मानना था कि विजय की पार्टी केवल वोट काटने का काम करेगी या प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' की तरह जमीन तलाशने में ही जुटी रहेगी। लेकिन वर्तमान आंकड़े बताते हैं कि विजय ने अपनी लोकप्रियता को प्रभावी ढंग से वोटों में तब्दील किया है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वे एमजी रामचंद्रन और जयललिता जैसी उन फिल्मी हस्तियों की लीग में शामिल हो गए हैं जिन्होंने पर्दे से निकलकर सत्ता के गलियारों तक का सफर सफलतापूर्वक तय किया।

हालांकि, विजय के लिए यह डगर दिल्ली के 2013 के चुनाव जितनी सरल नहीं थी। तमिलनाडु का चुनावी ढांचा बहुत पुराना और मजबूत है, जहाँ द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) जैसे दलों का अपना एक समर्पित कैडर और वफादार मतदाता आधार है। इसके बावजूद टीवीके का इतनी सीटों पर बढ़त बनाना यह दर्शाता है कि मतदाता अब एक वैकल्पिक राजनीति की तलाश में थे। विजय ने स्वयं को एक भ्रष्टाचार मुक्त और जनकल्याणकारी नेता के रूप में प्रस्तुत किया है, जो क्षेत्रीय स्वाभिमान और आधुनिक विकास की बात करता है।

जैसे-जैसे मतगणना के अंतिम परिणाम सामने आ रहे हैं, यह साफ होता जा रहा है कि तमिलनाडु में एक नए राजनीतिक सूर्य का उदय हो चुका है। विजय की यह जीत न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय है। यदि टीवीके बहुमत का आंकड़ा छू लेती है, तो यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में किसी फिल्मी सितारे द्वारा पहली बार में सत्ता हासिल करने की दुर्लभतम घटनाओं में से एक होगी। विजय अब तमिलनाडु की राजनीति के केंद्र में हैं और आने वाले समय में उनकी नीतियां और निर्णय ही राज्य का भविष्य तय करेंगे।

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