तस्वीर में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए।

अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सेना के बीच कई स्थानों पर कथित तौर पर आमने-सामने की स्थिति बनने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इस मामले में चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए कहा कि चीन के प्रति सरकार की ओर से लगातार रियायतें दी जा रही हैं, जबकि सीमा पर तनाव को लेकर प्रधानमंत्री और उनकी सरकार की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के बयान के बाद कांग्रेस ने सीमा पर जारी घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की। इस रिपोर्ट में ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के हवाले से बताया गया कि पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सेना के बीच आमने-सामने की स्थिति बनी। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति अभी भी जारी है।

जयराम रमेश ने कहा कि ITBP महानिदेशक ने हाल में चीनी सेना (PLA) के साथ हुई आमने-सामने की स्थितियों के दौरान भारतीय बलों के प्रदर्शन की सराहना की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सीमा पर ऐसी स्थिति बनी हुई है, तो प्रधानमंत्री और उनके कार्यालय की ओर से इस पर चुप्पी क्यों है।

कांग्रेस नेता ने अरुणाचल प्रदेश के तक्सिंग क्षेत्र में हुई घटना के बाद सीमा पर गश्त और चीन की गतिविधियों का मुद्दा भी उठाया। जयराम रमेश के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश में तवांग क्षेत्र से जुड़े तक्सिंग में आमने-सामने की स्थिति बनने के बाद पिछले महीने वाचा और दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने एक बार फिर गश्त वाले कुछ स्थानों तक पहुंच खोने की जानकारी दी है। उन्होंने इसकी तुलना लद्दाख में पहले सामने आए सीमा विवाद से की।

जयराम रमेश ने चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने और वहां बड़े बांध के निर्माण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन की गतिविधियां भारत की पर्यावरणीय सुरक्षा और जल सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हैं। इन दावों और घटनाक्रमों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।

चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर भी कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। जयराम रमेश के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर रिकॉर्ड 112 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह 99 अरब डॉलर था। व्यापार घाटे का अर्थ है कि भारत चीन से जितने मूल्य का सामान आयात करता है, उसकी तुलना में वहां कम मूल्य का सामान निर्यात करता है।

कांग्रेस का कहना है कि चीन से बढ़ते आयात का भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के बावजूद कई उद्योगों में चीन से आयात पर निर्भरता बनी हुई है। उन्होंने इसे भारत की आर्थिक सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बताया।

जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 19 जून 2020 के बयान का भी हवाला दिया। गलवां घाटी में भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद आए इस बयान में प्रधानमंत्री ने कहा था कि न तो कोई भारतीय सीमा में घुसा है और न ही किसी भारतीय चौकी पर दूसरे पक्ष का कब्जा है। कांग्रेस नेता ने इस बयान का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर सरकार के रुख का देश को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

लद्दाख में चीन के साथ तनाव के दौरान सेना को मिले निर्देशों का जिक्र करते हुए जयराम रमेश ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि नरवणे ने अपने कार्यकाल के दौरान चीनी घुसपैठ की स्थिति में मिले निर्देशों के बारे में बताया था कि उन्हें कहा गया था कि जो उचित समझें, वह करें।

इसके अलावा, कांग्रेस नेता ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सैन्य अभियान में चीन की भूमिका को लेकर उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह के सार्वजनिक बयान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बाद में पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने इस संबंध में अलग बात कही थी। जयराम रमेश ने जनरल चौहान के एक थिंक टैंक से जुड़ने को लेकर भी सवाल उठाए।

चीन के साथ सीमा विवाद और भारत की चीन नीति को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच पहले भी कई बार राजनीतिक टकराव हो चुका है। कांग्रेस लगातार मोदी सरकार पर चीन के साथ सीमा संबंधी मामलों को ठीक से नहीं संभालने का आरोप लगाती रही है। दूसरी ओर, भाजपा पहले कांग्रेस पर सेना का मनोबल गिराने का आरोप लगा चुकी है। अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कथित आमने-सामने की स्थितियों को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर सीमा सुरक्षा, चीन नीति और सरकार की जवाबदेही को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।