पिपलिया खुर्द में टूटी सड़क पर कीचड़ में फंसी बच्चों से भरी स्कूल बस, ग्रामीणों ने ट्रैक्टर से निकाला बाहर
पिपलिया खुर्द में बारिश के बाद टूटी पक्की सड़क पर कीचड़ में बच्चों से भरी निजी स्कूल बस फंस गई। ग्रामीणों ने ट्रैक्टर की मदद से बस को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के बाद सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मरम्मत कराने की मांग उठाई।
तस्वीर में पिपलिया खुर्द में कीचड़ से भरी सड़क पर एक ट्रैक्टर द्वारा फंसी हुई स्कूली बस को खींचकर बाहर निकालते हुए ग्रामीण दिखाई दे रहे हैं।
जैतारण उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत पिपलिया खुर्द में विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति उस समय सामने आ गई, जब बारिश के बाद टूटी हुई पक्की सड़क पर बने गहरे गड्ढों और कीचड़ में बच्चों से भरी एक निजी स्कूल बस बीच रास्ते में फंस गई। बस में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे सवार थे। बस के फंसते ही कुछ समय के लिए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों तथा ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। बस को बाहर निकालने के लिए काफी प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर ट्रैक्टर मंगवाया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने सामूहिक प्रयास करते हुए ट्रैक्टर की सहायता से बस को सुरक्षित बाहर निकाला। राहत की बात यह रही कि इस दौरान कोई बच्चा घायल नहीं हुआ और सभी सुरक्षित अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव की यह पक्की सड़क लंबे समय से जगह-जगह से क्षतिग्रस्त पड़ी हुई है। बरसात के मौसम में सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर जाता है और पूरी सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है। ऐसे में स्कूल बसों, दोपहिया वाहनों और अन्य वाहनों का आवागमन बेहद कठिन और जोखिम भरा हो जाता है। उनका कहना है कि इस सड़क की समस्या से कई बार संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं करवाई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। जिस सड़क से प्रतिदिन स्कूली बच्चों की बस गुजरती है, उसकी ऐसी बदहाल स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सड़क की तत्काल मरम्मत करवाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और ग्रामीणों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।