तस्वीर में हेमेंद्र सिंह गले में गेंदे के फूलों की माला पहने और कांवड़ के साथ ग्रामीणों के बीच खड़े हैं।

ब्यावर/जवाजा। सावन के पवित्र महीने में मगरा क्षेत्र के जवाजा के निकट नाईकलां गांव के 18 वर्षीय हेमेंद्र सिंह, पुत्र पूरन सिंह, की शिव भक्ति और कठिन कांवड़ यात्रा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ऋषिकेश, नीलकंठ महादेव, हरिद्वार और काशी (वाराणसी) के दर्शन के बाद हेमेंद्र सिंह ने पुष्कर से 41 लीटर जल लेकर नाईकलां गांव तक की यात्रा अकेले पैदल पूरी की।

हेमेंद्र सिंह एक दिन व्यक्तिगत काम से ब्यावर गए थे। वहां से गुजर रहे कांवड़ियों के जत्थे और उनके उत्साह को देखकर उनके मन में भी गांव और परिवार की खुशहाली व शांति के लिए कांवड़ यात्रा करने का संकल्प जागा। सावन के तीसरे सोमवार को वे नाईकलां गांव से बस द्वारा रवाना हुए। बस से ऋषिकेश पहुंचने के बाद उन्होंने नीलकंठ महादेव, हरिद्वार तथा काशी (वाराणसी) जैसे पवित्र धामों की कठिन पैदल यात्राएं पूरी कीं।



विभिन्न तीर्थों के दर्शन के बाद हेमेंद्र सिंह ने पुष्कर से अपने गांव नाईकलां तक की कांवड़ यात्रा पूरी तरह अकेले पैदल शुरू की। कंधों पर 41 लीटर जल की भारी कांवड़ उठाकर वे दिन-रात की परवाह किए बिना आगे बढ़ते रहे। इस दौरान उनके मुख से लगातार “बम-बम भोले” और “हर-हर महादेव” का जाप होता रहा।

यात्रा के दौरान देवाता, ब्यावर, जवाजा और सारोट चौराहा पहुंचने पर स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं ने ढोल-नगाड़ों, डीजे और पुष्पवर्षा के साथ हेमेंद्र सिंह का जोरदार स्वागत किया। नाईकलां गांव पहुंचने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके स्वागत के लिए उमड़ पड़े। सैकड़ों महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने मालाएं पहनाकर तथा साफा ओढ़ाकर 18 वर्षीय शिवभक्त का अभिनंदन किया।

बेटे की कठिन तपस्या और ग्रामीणों के स्नेह को देखकर हेमेंद्र के पिता पूरन सिंह, माता कमला देवी, दादी घिसी देवी तथा काका रणजीत सिंह, रमेश सिंह और छगन सिंह की आंखें खुशी से छलक आईं। रास्ते में हेमेंद्र को कांवड़ लेकर जाते हुए देखकर मगरा क्षेत्र के कई युवाओं ने उनके वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए। युवाओं ने अगले वर्ष गांव की सुख-समृद्धि के लिए कांवड़ यात्रा निकालने का संकल्प भी जताया।

नाईकलां पहुंचने के बाद हेमेंद्र सिंह ने गांव के प्रमुख शिव मंदिर में जाकर पुष्कर से लाए 41 लीटर जल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। इस अवसर पर पूरा गांव मौजूद रहा। इसके बाद देर रात तक भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया।

सावन के चौथे सोमवार को ब्यावर और आसपास के पूरे मगरा क्षेत्र में हेमेंद्र सिंह की इस अनूठी कांवड़ यात्रा और शिव भक्ति की ही चर्चा और सराहना होती रही।

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