स्माइल फाउंडेशन का बड़ा फैसला, हर साल 15 हजार युवाओं के लिए एआई प्रशिक्षण अनिवार्य
स्माइल फाउंडेशन ने 15 हजार से अधिक युवाओं के लिए एआई प्रशिक्षण अनिवार्य किया है। जानिए किन राज्यों में यह पहल शुरू हुई है।
तस्वीर में स्माइल फाउंडेशन का आधिकारिक लोगो दिखाई दे रहा है, जिसमें पीले रंग के गोले के भीतर मुस्कुराता हुआ चेहरा और नीचे हरे रंग की पृष्ठभूमि पर 'स्माइल फाउंडेशन' लिखा हुआ है।
स्माइल फाउंडेशन ने अपने ‘स्किल ट्रेनिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी प्रोग्राम’ के तहत 21वीं सदी के कौशल कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित शिक्षा को अनिवार्य कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य प्रौद्योगिकी आधारित कार्यस्थल के लिए जरूरतमंद युवाओं को आवश्यक कौशल उपलब्ध कराना है।
एआई आधारित शिक्षा की यह पहल वर्तमान में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली, ओडिशा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल स्थित एसटीईपी केंद्रों में संचालित की जा रही है। स्माइल फाउंडेशन के अनुसार, इससे हर साल 15,000 से अधिक युवाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस पहल की शुरुआत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद की गई है। संबोधन में उन्होंने घोषणा की थी कि अगले साल के दौरान सरकार एक करोड़ युवाओं को एआई में प्रशिक्षण देगी। इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अलग से निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग देने की योजना भी है। ऐसे में स्माइल फाउंडेशन की यह पहल भारत के युवा कार्यबल को एआई के लिए तैयार करने की राष्ट्रीय प्राथमिकता के अनुरूप है।
कार्यक्रम के तहत एआई को कक्षा में शिक्षण और प्रशिक्षक के नेतृत्व वाली प्रशिक्षण प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। स्माइल फाउंडेशन ने लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम यानी शिक्षा प्रबंधन प्रणाली को भी अपग्रेड किया है, जिसमें एआई-सक्षम उपकरण शामिल किए गए हैं। छात्र और अध्यापक प्रशिक्षण के दौरान इन उपकरणों का उपयोग कर सकेंगे।
नए ढांचे के तहत प्रशिक्षकों को एआई प्रशिक्षक मार्गदर्शक की सुविधा मिलेगी। इसे अवधारणाओं को सरल बनाने, शिक्षण में मार्गदर्शन देने और प्रासंगिक उदाहरण सुझाने के लिए डिजाइन किया गया है। छात्र शिक्षा के दौरान वास्तविक समय में सहायता पाने के लिए एआई ट्यूटर का भी इस्तेमाल कर सकेंगे।
कार्यक्रम में एआई करियर सलाहकार भी शामिल किया गया है, जो छात्रों की रुचि के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में उपयुक्त नौकरी भूमिकाओं का सुझाव देगा। वहीं, एआई इंटरव्यू कोच छात्रों को मॉक इंटरव्यू का अभ्यास करने और एआई के माध्यम से प्रतिक्रिया प्राप्त करने का अवसर देगा। इससे छात्रों में संचार कौशल और आत्मविश्वास विकसित करने के साथ उन्हें कार्यस्थल के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।
स्माइल फाउंडेशन के सह-संस्थापक सांतनु मिश्र ने कहा, “एआई हमारे सीखने, काम करने और करियर बनाने के तरीके को बदल रहा है। वे युवा जो जल्द कार्यबल में प्रवेश करने वाले हैं, खासतौर पर वंचित समुदायों के युवाओं के लिए इन टूल्स की पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि उनके लिए ये सुविधाएं डिजिटल-अंतर बनकर न रह जाएं।”
उन्होंने आगे कहा, “एआई को हमारे 21वीं सदी के कौशल कार्यक्रम में शामिल कर हम छात्रों को एआई का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना चाहते हैं, ताकि वे कार्यस्थल में प्रवेश करने से पहले ही इस अवधारणा को समझ सकें, करियर के बारे में जान सकें और आत्मविश्वास के साथ इंटरव्यू एवं नौकरी की तैयारी कर सकें।”
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब विभिन्न क्षेत्रों में प्रवेश स्तर की नौकरियों के लिए कर्मचारियों को डिजिटल और एआई आधारित उपकरणों का उपयोग करना पड़ रहा है। ऐसे में रोजगार एवं कौशल के क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों के लिए बुनियादी डिजिटल साक्षरता से आगे बढ़कर यह सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है कि युवा वास्तविक परिस्थितियों में प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग कर सकें।
वित्तीय वर्ष 26 के दौरान स्माइल फाउंडेशन ने 10,546 युवाओं को प्रशिक्षित किया है। इनमें से 7,380 युवाओं को रोजगार मिला है। इस तरह प्लेसमेंट की दर लगभग 70 फीसदी रही है। उम्मीदवारों को डेटा मैनेजमेंट, इन्वेंटरी मैनेजमेंट, बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग, सेल्स, रिटेल और मार्केटिंग में प्रवेश स्तर के अवसर मिले हैं।
फाउंडेशन ने कहा कि एआई उपकरण अब केवल अलग-अलग प्रौद्योगिकी मॉड्यूल तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि इन्हें पारंपरिक संचार, रोजगार क्षमता और कार्यस्थल कौशल में शामिल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को कार्यबल में प्रवेश करने से पहले ही एआई से परिचित कराना है, ताकि वे सीखने, करियर की जानकारी, इंटरव्यू और कार्यस्थल की तैयारी के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग कर सकें।