आउटसोर्सिंग से सरकारी भर्ती आरक्षण के लिए खतरा, कैंसर से भी खतरनाक: आरबी सिंह पटेल
आरबी सिंह पटेल ने आउटसोर्सिंग व संविदा भर्तियों में आरक्षण की मांग की और इसे कैंसर से भी खतरनाक बताते हुए सामाजिक न्याय पर जोर दिया।
तस्वीर में अपना दल (एस) के राष्ट्रीय महासचिव आरबी सिंह पटेल एक मंच पर खड़े होकर संबोधित करते हुए नजर आ रहे हैं, जिनके पीछे डॉ. सोनेलाल पटेल और पार्टी नेताओं के बड़े बैनर और पोस्टर लगे हैं।
अपना दल (एस) के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी आरबी सिंह पटेल ने जातीय जनगणना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ ही आउटसोर्सिंग और संविदा के माध्यम से होने वाली सरकारी भर्तियों में भी आरक्षण लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग के जरिए होने वाली भर्तियों में ओबीसी एवं एससी/एसटी वर्ग को आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया तो यह वंचित वर्गों के साथ घोर अन्याय होगा। उन्होंने आउटसोर्सिंग व्यवस्था को लेकर कहा कि यह कैंसर से भी खतरनाक साबित हो सकती है।
आरबी सिंह पटेल ने कहा कि सरकार नियमित एवं सीधी भर्तियों के स्थान पर लगातार आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति कर रही है। इसका सबसे अधिक असर उन वर्गों पर पड़ रहा है, जिन्हें आरक्षण के माध्यम से सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद रहती है।
उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना से देश में विभिन्न सामाजिक वर्गों की वास्तविक जनसंख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। इसके आधार पर आरक्षण की नीतियों की समीक्षा और निर्धारण किया जाना चाहिए, ताकि सभी वर्गों को उनकी आबादी और सामाजिक स्थिति के अनुरूप न्याय मिल सके।
आरबी सिंह पटेल ने कहा कि पहले समाज के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नौकरियों में अवसर मिल जाता था। लेकिन अब नियमित भर्तियों के स्थान पर आउटसोर्सिंग का चलन बढ़ने से इन वर्गों के लिए रोजगार के अवसर लगातार सीमित होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छोटी सरकारी नौकरियां भी सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के लिए आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण माध्यम रही हैं। ऐसे में इन अवसरों का खत्म होना चिंता का विषय है।
उन्होंने संविदा कर्मचारियों के लिए भी आरक्षण की वकालत की। आरबी सिंह पटेल ने कहा कि यदि किसी संस्था या विभाग में सरकार के अधीन कार्य हो रहा है और कर्मचारियों की नियुक्ति सरकारी व्यवस्था के माध्यम से हो रही है, तो ऐसे रोजगार में भी सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी चाहे नियमित हो, संविदा हो या किसी अन्य व्यवस्था के माध्यम से हो, उसमें आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों की भावना का सम्मान होना चाहिए।
उन्होंने न्यायपालिका में वंचित एवं पिछड़े वर्गों की भागीदारी बढ़ाने के लिए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के गठन की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में देश के सभी सामाजिक वर्गों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
पंचायत स्तर पर लंबित शिकायतों का उल्लेख करते हुए आरबी सिंह पटेल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए पंचायतों से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उन्होंने किसानों की समस्याओं पर भी चिंता जताते हुए कहा कि किसानों की अनेक समस्याएं अब भी जस की तस बनी हुई हैं, जिनका सरकारों को प्राथमिकता के आधार पर समाधान करना चाहिए।
आरबी सिंह पटेल की मांगों में सरकारी भर्तियों की सभी व्यवस्थाओं में आरक्षण के पालन, जातीय जनगणना में पारदर्शिता, न्यायपालिका में व्यापक प्रतिनिधित्व तथा पंचायत और किसान समस्याओं के त्वरित समाधान पर जोर दिया गया है।