मुंबई की लाइफलाइन: भारी बारिश से लबालब हुई विहार और तुळसी झील, शहर को मिली बड़ी राहत

मुंबई में मूसलाधार बारिश का असर दिखने लगा है, जहां विहार और तुळसी झील के ओवरफ्लो होने से शहरवासियों को बड़ी राहत मिली है। आखिर कब और कैसे भरीं ये झीलें और क्या है इनका दिलचस्प इतिहास? जानने के लिए पूरी खबर पढ़ें।

Update: 2026-07-08 14:28 GMT

तस्वीर में मुंबई की तुळसी झील का जलस्तर क्षमता से अधिक होने के कारण उसका पानी बाहर बहता हुआ दिखाई दे रहा है।

मुंबई के लिए राहत भरी खबर है कि शहर में पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश का सकारात्मक असर जलाशयों पर दिखने लगा है। मुंबई को जल आपूर्ति करने वाले सात महत्वपूर्ण जलाशयों में से विहार और तुळसी झील अब पूरी तरह भर चुकी हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका के जल अभियंता विभाग के अनुसार मंगलवार 7 जुलाई 2026 की रात मुंबई के लिए काफी उत्साहजनक रही। रात 9 बजे विहार झील लबालब होकर ओसंडने लगी और इसके कुछ ही घंटों बाद रात 11:43 बजे तुळसी झील ने भी अपनी पूर्ण क्षमता हासिल कर ली और वह भी ओसंड कर बहने लगी। हालांकि इन दो प्रमुख झीलों के भर जाने के बावजूद पूरे मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले सभी सात जलाशयों का कुल जल भंडारण अभी भी उनकी कुल क्षमता का लगभग 41.43 प्रतिशत ही है।

तुळसी झील का इतिहास काफी पुराना और दिलचस्प है। यह मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर यानी करीब 22 मील की दूरी पर स्थित है। इस कृत्रिम झील का निर्माण कार्य सन 1879 में पूरा हुआ था और उस दौर में इसे बनाने के लिए करीब 40 लाख रुपये का खर्च आया था। यह मुंबई को पानी पिलाने वाले सातों तालाबों में सबसे छोटी झील है। इसकी उपयोग जल धारण क्षमता 804.6 करोड़ लीटर यानी 8046 मिलियन लीटर है और इतनी कम क्षमता के बावजूद यह झील शहर को प्रतिदिन लगभग 18 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति करती है। झील का पाणलोट क्षेत्र 6.76 किलोमीटर का है और पूरी तरह भरने पर इसका जल क्षेत्र लगभग 1.35 वर्ग किलोमीटर तक फैल जाता है।

पिछले वर्षों के रिकॉर्ड पर गौर करें तो तुळसी झील के भरने की यह घटना इस बार काफी समय से पहले हुई है। पिछले साल यह झील 16 अगस्त 2025 को लबालब हुई थी, जबकि वर्ष 2024 में इसने 4 अगस्त को अपनी पूर्ण क्षमता हासिल की थी। इस झील की एक प्रमुख विशेषता यह भी है कि जब यह पूरी तरह भरकर ओसंडती है, तो इसका अतिरिक्त पानी विहार झील में जाकर मिल जाता है, जिससे वहां भी जल स्तर बना रहता है। पिछले कुछ दिनों में झील के जलग्रहण क्षेत्र में हुई जोरदार बारिश ने ही इसे भर दिया है, जिससे मुंबई के जल संकट के मोर्चे पर एक बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

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