तस्वीर में मुंबई के हॉल में पर्युषण महापर्व बैनर के सामने जैन मुनि और श्रद्धालु उपस्थित हैं।

मुंबई। आत्मशुद्धि, संयम और साधना के महापर्व पर्युषण का प्रथम दिन तेरापंथ समाज ने श्रद्धा एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ ‘खाद्य संयम दिवस’ के रूप में मनाया। पर्व के पहले ही दिन श्रावक-श्राविकाओं ने आहार में संयम के साथ आत्मनिरीक्षण और साधना की दिशा में कदम बढ़ाया।

कार्यक्रम में मुनि मुकुल कुमार ने ‘खाद्य संयम’ विषय पर प्रेरणादायी वक्तव्य देते हुए इसे आधुनिक जीवनशैली से जोड़ा। उन्होंने कहा कि आज मनुष्य आवश्यकता से अधिक स्वाद के आकर्षण में जी रहा है। भोजन जीवन का आधार है, लेकिन जब स्वाद आवश्यकता पर हावी हो जाता है, तब संयम कमजोर पड़ने लगता है। खाद्य संयम केवल भोजन कम करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण और विवेक जागृत करने की साधना है।


मुनि मुकुल कुमार ने आधुनिक खान-पान की आदतों, स्वाद-लोलुपता और अनियमित जीवनशैली के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण बातें रखीं। उन्होंने कहा कि भोजन के प्रति जागरूकता व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक जीवन को भी प्रभावित करती है।

मुनि कुलदीप कुमार ने पर्युषण पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्युषण केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा के समीप जाने की आध्यात्मिक यात्रा है। इन दिनों व्यक्ति को अपने जीवन का मूल्यांकन करते हुए अपनी कमियों, प्रमाद और कषायों को पहचानने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने पर्युषण आराधना के विभिन्न आयामों को समझाते हुए कहा कि तप, त्याग, स्वाध्याय, सामायिक, प्रतिक्रमण, ध्यान और आत्मचिंतन के माध्यम से इन दिनों को सार्थक बनाया जा सकता है। पर्युषण का वास्तविक उद्देश्य बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि अंतरमन का परिष्कार और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।

मुंबई सभा के कर्मठ अध्यक्ष सुरेंद्र कोठारी ने मुनि कुलदीप कुमार के स्वास्थ्य की मंगल कामना करते हुए मुंबई सभा के कार्यों की विशद अवगति प्रदान की। मुनि कुलदीप कुमार ने मुनि मुकुल कुमार के सेवा कार्यों की विशिष्टतम सराहना की।

कार्यक्रम का मंगलाचरण महिला मंडल ठाणे की बहनों ने किया। सभा के मंत्री राजेश जी बाफना ने आगामी कार्यक्रमों की सूचना दी। इस तरह पर्युषण के प्रथम दिन खाद्य संयम के संदेश के साथ आत्मनिरीक्षण, साधना और आध्यात्मिक आराधना का क्रम शुरू हुआ।

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